Bareilly magistrate Resigns: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग यानी (UGC) के नए कानून और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को प्रयागराज में स्नान से रोके जाने का विवाद बढ़ता जा रहा है. सवर्ण समाज ही नहीं, बल्कि बीजेपी के कई नेता भी इसके खिलाफ हैं. वहीं इस कड़ी में अब अधिकारियों ने भी मोर्चा खोलना शुरू कर दिया है. UGC एक्ट और शंकराचार्य के अपमान को लेकर बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने इस्तीफा दे दिया है.
‘जनप्रतिनिधि कॉर्पोरेट कंपनी के सेवक बनकर रह गए हैं’
पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री ने कई पन्नों में अपना इस्तीफा दिया है. इस पत्र में उन्होंने प्रयागराज माघ मेले में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों से मारपीट और यूजीसी के नए कानून को इस्तीफे की वजह बताया है. अलंकार अग्निहोत्री ने कहा कि नए कानून में सामान्य वर्ग के छात्रों की फर्जी शिकायत करके उनके शोषण से इनकार नहीं किया जा सकता है.
यह विषम परिस्थिति अपने देश में व्यापक स्तर पर आंन्तरिक कलह बनेगी. वर्तमान सरकार अंग्रेजों की डिवाइड एंड रूल (Divide & Rule) की नीति पर कार्य कर रही है. इसको तुरंत वापस लेना होगा. इन दोनों गंभीर मामलों में केंद्र और राज्य सरकार में ब्राह्मण और सामान्य वर्ग के जन प्रतिनिधियों ने कोई भी विरोध नहीं व्यक्त किया. यह एक अत्यंत भ्रम और असमंजस की स्थिति है, जिसमें ब्राहमण और सामान्य वर्ग के अन्य जनप्रतिनिधि अपने सजातीय समाज के प्रति जवाबदेह न होकर किसी कॉर्पोरेट कंपनी के सेवर बन कर रह गये हैं. वे केवल मूकदर्शक बने हुए हैं.’
ब्राह्मणों की मर्यादा का हनन किया गया
अलंकार अग्निहोत्री ने पत्र में आगे लिखा, ‘ ‘महोदया इस वर्ष 2026 के प्रयागराज में माघ मेले में मौनी अमावस्या के स्नान के दौरान जोतिष पीठ ज्योर्तिमठ के शंकराचार्य श्री अविमुक्तेश्वरानन्द और उनके शिष्यों को स्थानीय प्रशासन ने मारपीट की. बटुक ब्राह्वाण को जमीन पर गिराकर उसकी सिखा को हांथ से घसीटकर पीटा गया और उसकी मर्यादा का हनन किया गया. शिखा ब्राह्माण, साधु-सन्तों का धार्मिक और सांस्कृतिक प्रतीक है. घटना से यह स्पष्ट है कि स्थानीय प्रशासन द्वारा ब्राह्माणों का देश व्यापी अपमान किया गया है. यह एक चिन्तनीय एवं गंभीर विषय है. स्थानीय प्रशासन और वर्तमान की राज्य सरकार एक ब्राहाण विरोधी विचारधारा के साथ काम कर रही है और साधु सत्तों की अस्मिता के साथ खिलवाड़ कर रही है.’
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