MLC की 10 सीटों पर सियासी संग्राम! 9 सीटों पर NDA की नजर, उम्मीदवारों को लेकर मंथन तेज
बिहार चुनाव
Bihar MLC Elections 2026: बिहार विधान परिषद की 10 सीटों पर होने वाले चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं. इनमें 9 सीटें नियमित चुनाव के तहत खाली हो रही हैं, जबकि एक सीट पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के बाद खाली हुई है, जिस पर उपचुनाव होने वाला है. चुनाव आयोग ने 18 जून को मतदान और उसी दिन मतगणना का कार्यक्रम तय किया है. इन सब सीटों पर अब एनडीए खासतौर पर बीजेपी की नजर है.
इस चुनाव में सबसे अधिक चर्चा NDA के संभावित सीट बंटवारे और नए चेहरों की एंट्री को लेकर है. बिहार विधानसभा में NDA के पास 200 से अधिक विधायकों का समर्थन है, जिसके आधार पर गठबंधन को 10 में से कम से कम 9 सीटें जीतने की मजबूत संभावना मानी जा रही है. वहीं विपक्षी महागठबंधन के पास इतनी संख्या है कि वह मुश्किल से एक सीट पर दावा पेश कर सकता है.
NDA में सीटों को लेकर बढ़ी हलचल
सूत्रों के अनुसार जेडीयू अपनी मौजूदा सीटों को बरकरार रखना चाहती है, जबकि भाजपा भी पिछली बार से अधिक प्रतिनिधित्व की कोशिश में है. इसके अलावा सहयोगी दलों जैसे जीतन राम मांझी की पार्टी HAM, एलजेपी (रामविलास) और अन्य सहयोगी भी हिस्सेदारी की मांग कर रहे हैं. मांझी ने सार्वजनिक रूप से एक सीट पर दावा ठोकते हुए कहा है कि इससे गठबंधन और मजबूत होगा.
नए चेहरों पर भी सबकी नजर
इस बार चुनाव केवल सीटों की लड़ाई नहीं बल्कि नई पीढ़ी की राजनीतिक एंट्री का मंच भी बन सकता है. कई राजनीतिक परिवारों के उत्तराधिकारियों के नाम चर्चा में हैं. साथ ही बिहार सरकार में मंत्री बनाए गए कुछ नेताओं को विधानमंडल का सदस्य बनाने के लिए भी यह चुनाव महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
किन सीटों पर होने जा रहा चुनाव?
जिन सदस्यों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है उनमें जेडीयू, भाजपा, राजद और कांग्रेस के सदस्य शामिल हैं. सम्राट चौधरी, संजय मयूख, गुलाम गौस, भीष्म साहनी, कुमुद वर्मा, भगवान सिंह कुशवाहा, मोहम्मद फारुख, सुनील कुमार सिंह और समीर कुमार सिंह से जुड़ी सीटों पर चुनाव होना है. इसके अलावा नीतीश कुमार के इस्तीफे से खाली हुई सीट पर भी उपचुनाव कराया जाएगा.
विपक्ष के सामने सबसे बड़ी चुनौती
राजद और कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपनी मौजूदा मौजूदगी को बचाए रखना है. संख्या बल NDA के पक्ष में होने के कारण विपक्ष की कोशिश कम से कम एक सीट सुरक्षित रखने की है. यदि NDA रणनीतिक रूप से एकजुट रहा तो वह लगभग क्लीन स्वीप की स्थिति में पहुंच सकता है.
कुल मिलाकर, बिहार विधान परिषद चुनाव केवल ऊपरी सदन की 10 सीटों का मुकाबला नहीं है, बल्कि यह NDA के भीतर शक्ति संतुलन, सहयोगी दलों की हैसियत, नए राजनीतिक चेहरों की एंट्री और आगामी राजनीतिक समीकरणों की दिशा तय करने वाला चुनाव भी माना जा रहा है.
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