EWS Reservation Debate: देश की राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर बीते दिनों आरक्षण को लेकर प्रदर्शन हुआ. प्रदर्शन कर रहे लोगों की मांग थी कि आरक्षण देने के तरीकों में बदलाव किया जाना चाहिए. उनका तर्क था कि जाति के आधार पर आरक्षण नहीं देना चाहिए. अब इस मामले में बीजेपी प्रवक्ता के एक बयान ने नई बहस छेड़ दी है.
BJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता अजय आलोक ने कहा कि मोदी सरकार ने आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग के लोगों के लिए 10 प्रतिशत EWS आरक्षण दिया. EWS के जरिए सरकार ने उन कई लोगों की चिंताओं को पहले ही दूर कर दिया है. प्रवक्ता के इस बयान पर प्रदर्शनकारियों ने भी पलटवार किया है.
पहले जान लीजिए अजय आलोक ने क्या कहा?
अजय आलोक ने अपने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी किया है. इसमें उन्होंने कहा कि सरकार ने समाज के विभिन्न वर्गों के हितों को ध्यान में रखते हुए कई कदम उठाए हैं. उन्होंने राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा देने और OBC वर्गीकरण से जुड़े प्रयासों का भी जिक्र किया. उनका कहना था कि आरक्षण और UGC नियमों को लेकर चल रहे विवाद से समाज में जातिगत तनाव बढ़ाने की कोशिश हो रही है.
उन्होंने सवाल उठाया कि उन समुदायों पर भी चर्चा होनी चाहिए, जिन्हें आरक्षण व्यवस्था का अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाया है. अजय आलोक के अनुसार, आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग के लिए 10 प्रतिशत EWS आरक्षण सरकार की इसी सोच का हिस्सा है.
प्रदर्शनकारियों ने किया पलटवार
आरक्षण सुधार आंदोलन से जुड़े लोगों ने इस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है, आंदोलनकारियों का कहना है कि किसी भी नागरिक को उस नीति पर सवाल उठाने और अपनी राय रखने का अधिकार है, जिसका असर उसके भविष्य और अवसरों पर पड़ता है. उन्होंने अजय आलोक के इस तर्क को भी चुनौती दी कि केवल संबंधित समुदाय ही किसी मुद्दे पर बोल सकता है.
आरक्षण सुधार की मांग BJP के लिए भी एक चुनौती बनकर उभरी है, क्योंकि प्रदर्शन में शामिल सामान्य वर्ग के कई लोग पार्टी के पारंपरिक समर्थक माने जाते हैं. दूसरी ओर दलित और OBC नेताओं ने आरक्षण व्यवस्था को समाप्त करने या कमजोर करने की मांग का विरोध किया है.
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