Cockroach Janta Party Protest: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके को दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार शाम को हिरासत में लिया था, जिसके बाद अब गिरफ्तार कर लिया गया है. वहीं दूसरी तरफ ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की अध्यक्ष नेहा बोरा को हिरासत में लेने के बाद रिहा कर दिया गया. दोनों के खिलाफ यह कार्रवाई 16 अक्टूबर को दिल्ली के कनॉट प्लेस में प्रस्तावित ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च से पहले की गई थी.
8 दिन में दिपके के खिलाफ यह दूसरी बार कार्रवाई है. इससे पहले 10 अक्टूबर को उन्हें दिल्ली एयरपोर्ट पर विमान से हिरासत में लिया गया था. अगले दिन वे रिहा हो गए थे.
दिल्ली पुलिस ने अभिजीत दिपके के खिलाफ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126 और 170 के तहत कार्रवाई की है. पुलिस की इस कार्रवाई का संबंध शांति भंग होने की आशंका से है. अब दिपके को स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) की अदालत में पेश किया जाना है.
पुलिस ने पहले दिया था नोटिस
दिपके को हिरासत में लेने से पहले पुलिस की एक टीम उनके झंडेवालान स्थित आवास पर पहुंची थी. पुलिस ने उन्हें नोटिस देकर चेतावनी दी थी. जिसमें कहा गया था कि बिना अनुमति मार्च निकालने से आम लोगों, कारोबारियों और राहगीरों को परेशानी हो सकती है. कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क के आसपास प्रतिबंधात्मक आदेश लागू थे. तिरंगा मार्च के लिए संबंधित अधिकारियों से अनुमति नहीं मिली थी.
इसके बावजूद प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर CJP अपने रुख पर कायम रही. संगठन की ओर से आरोप लगाया गया कि दिपके को हिरासत में लेने के बाद उनके ठिकाने की जानकारी नहीं दी जा रही थी. वकीलों को भी उनसे मिलने में परेशानी हुई.
नेहा बोरा को क्यों छोड़ा गया?
इस पूरे घटनाक्रम में नेहा बोरा की रिहाई भी अहम है. उन्हें 16 अक्टूबर की शाम मंडी हाउस के पास से हिरासत में लिया गया था. वह भी तिरंगा मार्च में शामिल होने जा रही थीं. हिरासत के बाद कई घंटों तक उनके ठिकाने को लेकर सवाल उठते रहे. दिल्ली पुलिस के अनुसार, नेहा बोरा को दिल्ली पुलिस अधिनियम की धारा 65 के तहत जरूरी हिरासत संबंधी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद रिहा कर दिया गया. नेहा बोरा रिहा होने के बाद बोलीं- सरकार को अपना अहंकार छोड़ना चाहिए.
ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन की तैयारी
CJP ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च का आह्वान किया था. संगठन और उससे जुड़े प्रदर्शनकारी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सवाल उठा रहे हैं. उनका आरोप है कि मतदाता सूची में बदलाव से मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं. इसी मुद्दे पर वे मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं. पिछले एक महीने से लगातार देशभर में प्रदर्शन हो रहे हैं.
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