Rajnath Singh on DRDO: वैश्विक हालात को देखते हुए भारत स्वदेशी हथियारों के उत्पादन को लेकर काफी ज्यादा बेचैन दिखाई दे रहा है. खासकर, बदलते दौर में वायुसेना की क्षमता को लेकर भारत का डेस्परेशन सातवें आसमान पर है. चीन की क्षमता को टक्कर देने की जहां एक तरफ चुनौती है, तो वहीं दूसरी तरफ दूसरे देशों से महंगी तकनीक खरीद और टाइम पर डिलवरी नहीं होना, एक बड़ी परेशानी है. भारत दुनिया में रक्षा क्षेत्र में भी अपनी बादशाहियत को लेकर काफी पैशनेट दिखाई दे रहा है. इसकी बानगी बेंगलुरू में तब देखने को मिली, जब रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) को सख्त निर्देश के साथ, 5 साल के भीतर फाइटर जेट का स्वदेशी इंजन तैयार करने की डेडलाइन दे डाली.
स्वदेशी फाइटर जेट इंजन विकास के लिए कड़ा रुख
कुल मिलाकर भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता से जुड़ी सबसे अहम तकनीक स्वदेशी फाइटर जेट इंजन को लेकर सरकार ने अब स्पष्ट और कड़ा रुख अपनाया है. राजनाथ सिंह ने DRDO को एयरो-इंजन विकास के लिए पांच साल की समयसीमा तय करते हुए कहा है कि वह वही लक्ष्य हासिल करे, जिसे दुनिया के विकसित देश 20 से 25 वर्षों में पूरा करते हैं.
बेंगलुरु स्थित Gas Turbine Research Establishment (GTRE) के दौरे के दौरान रक्षा मंत्री ने वैज्ञानिकों से कहा कि भारत अब लंबी प्रतीक्षा की स्थिति में नहीं है. उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि DRDO को यह मानकर काम करना चाहिए कि उसके शुरुआती 20 वर्ष पहले ही पूरे हो चुके हैं और अब सिर्फ अगले पांच साल में परिणाम देने होंगे.
एयरो-इंजन विकास पर सरकार का बढ़ता दबाव
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, आधुनिक फाइटर जेट इंजन किसी भी देश की सबसे जटिल और संवेदनशील रक्षा तकनीक होती है. इसमें अत्यधिक तापमान सहन करने वाली धातुएं, हाई-प्रिसिजन मैन्युफैक्चरिंग, जटिल डिजाइन और लंबी परीक्षण प्रक्रिया शामिल होती है. यही वजह है कि अब तक अमेरिका, रूस, फ्रांस और ब्रिटेन जैसे सीमित देशों के पास ही पूर्ण स्वदेशी इंजन तकनीक उपलब्ध है. भारत लंबे समय से फाइटर जेट इंजन के मामले में विदेशी निर्भरता से जूझता रहा है. चाहें हल्का लड़ाकू विमान तेजस हो या भविष्य की परियोजनाएं, इंजन के स्तर पर आत्मनिर्भरता अभी तक पूरी तरह हासिल नहीं हो सकी है.
AMCA और भविष्य की वायु शक्ति
रक्षा मंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) जैसे पांचवीं पीढ़ी के स्टेल्थ फाइटर विमान कार्यक्रम को आगे बढ़ा रहा है. रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि बिना स्वदेशी इंजन के यह परियोजना रणनीतिक रूप से अधूरी मानी जाएगी. राजनाथ सिंह ने इस दौरान यह भी संकेत दिया कि भारत को केवल पांचवीं पीढ़ी तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि भविष्य की छठी पीढ़ी की तकनीकों को ध्यान में रखकर अभी से शोध और विकास को गति देनी होगी.
रणनीतिक और औद्योगिक महत्व
रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, स्वदेशी एयरो-इंजन का विकास केवल सैन्य आवश्यकता नहीं है, बल्कि इसका असर रक्षा निर्यात, नागरिक विमानन, अंतरिक्ष कार्यक्रम और उन्नत मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर भी पड़ेगा. सरकार का मानना है कि इंजन तकनीक में आत्मनिर्भरता भारत को रक्षा क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर अधिक स्वतंत्र और प्रभावशाली बनाएगी.
सरकार का संदेश- समर्थन मिलेगा, लेकिन परिणाम जरूरी
रक्षा मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार DRDO को वित्तीय और नीतिगत समर्थन देने के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन अब प्राथमिकता समयबद्ध और व्यावहारिक परिणामों की होगी. उनके अनुसार, देश की सुरक्षा आवश्यकताएं अब धीमी प्रगति की अनुमति नहीं देतीं. कुल मिलाकर रक्षा मंत्री की यह घोषणा DRDO के लिए मात्र सिफ एक लक्ष्य नहीं, बल्कि जवाबदेही की नई रूपरेखा मानी जा रही है. आने वाले पांच वर्षों में स्वदेशी फाइटर जेट इंजन पर होने वाली प्रगति यह तय करेगी कि भारत रक्षा तकनीक के क्षेत्र में आयात-निर्भर देश बना रहता है या पूर्ण आत्मनिर्भर शक्ति के रूप में उभरता है.
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