Defense Budget: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए मोदी सरकार का आम बजट पेश किया है. जिसमें सरकार ने रक्षा के लिए अपना पिटारा खोल दिया है. इसके साथ ही सरकार स्वदेशी आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने की दिशा में काम करने का प्रयास कर रही है. बजट में रक्षा विभाग के लिए पिछले वित्तीय वर्ष से 15.19 प्रतिशत से ज्यादा इस बार आवंटित किया गया है. रक्षा बजट सरकार के कुल बजट का 14.67 प्रतिशत है. सरकार 1.39 लाख करोड़ रुपए सिर्फ देशी कंपनियों से रक्षा सामग्री खरीदारी के लिए रिजर्व रखा है.
ऑपरेशन सिंदूर के बाद देश का यह बजट है, जिसमें सरकार ने रक्षा बजट को बढ़ाने के लिए खूब जोर दिया है. सरकार का फोकस इस बजट में खूब रहा है. इस साल रक्षा मंत्रालय के लिए कुल बजट 7.85 लाख करोड़ रखा है. जो जीडीपी का लगभग 2 प्रतिशत है. इस बजट में पूंजीगत व्यय के लिए कुल 2.19 लाख करोड़ रुपए का प्रावधान है, जो पिछले साल के बजट से करीब 21.8 प्रतिशत ज्यादा है. पिछले साल सरकार ने बजट में सिर्फ 1.80 लाख करोड़ रुपए पूंजीगत व्यय के लिए दिया था. लेकिन इस बार बजट में 39 हजार करोड़ रुपए बढ़ा दिया गया है.
आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने पर फोकस
- सरकार ने इस बजट के माध्यम से आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने का प्रयास किया है. बजट में सिर्फ 1.39 लाख करोड़ रुपए स्वदेशी कंपनियों से रक्षा सामग्री खरीदने के लिए रिजर्व रखा है. इन पैसों से स्वदेशी फाइटर जेट और इंजनों की खरीदी की जाएगी.
- फ्रांस की कंपनी के ये विमान भारत में ही तैयार किए जाएंगे. इसकी कीमत लगभग 30 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा होगी. भारत ने इस बार के रक्षा बजट में जमकर खर्च किया है. हालांकि, इन दिनों दुनियाभर के देश रक्षा विभाग में जमकर पैसे लगा रहे हैं.
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भारत में ही बनेंगे सेना के हथियार
भारत अब आने वाले दिनों में नई पीढ़ी की पनडु्ब्बियां, लंबी दूरी के रॉकेट सिस्टम, कई तरह के ड्रोन, मॉडर्न एयर डिफेंस वेपन और लोइटरिंग म्यूनिशन की खरीदारी करेगा. इससे जुड़े मेंटेनेंस में उपयोग होने वाले कल-पुर्जे पर पूरी तरह से कस्टम ड्यूटी खत्म कर दी जाएगी. सरकार का पूरा फोकस है कि अब सेना के लिए हथियार भारत में ही बनें. इसलिए आत्मनिर्भरता को बढ़ाने के लिए इस बार रक्षा बजट भी बढ़ा दिया गया है. आने वाले कुछ सालों में भारत में ही खतरनाक हथियार बनेंगे. भारत हथियारों के मामले में दुनिया को अपनी ताकत दिखाएगा.
