Haryana: हरियाणा के सोनीपत में पेट्रोलियम पदार्थों की अवैध बिक्री और अंतरराष्ट्रीय तस्करी पर पूरी तरह से लगाम लगाने के लिए जिला प्रशासन एक्शन मोड में आ गया है. उपायुक्त नेहा सिंह ने अधिकारियों को पेट्रोल पंपों और डीजल उपयोग करने वाली औद्योगिक इकाइयों की सघन जांच करने के निर्देश दिए है.
उपायुक्त ने कहा कि ईंधन की असामान्य बिक्री, कालाबाजारी और बिना किसी वैध दस्तावेजों के परिवहन कड़ी नजर प्रशासन रखेगा. इसके साथ ही उन्होंने सीएम विंडो पर लंबे समय से लंबित शिकायतों के त्वरित निपटारे के भी निर्देश दिए हैं.
पेट्रोल की बिक्री पर रखी जाएगी नजर
लघु सचिवालय में आयोजित बैठक में उपायुक्त नेहा सिंह ने कहा कि जिले में हाई स्पीड डीजल (HSD) और पेट्रोल की बिक्री पर विशेष ध्यान दिया जाएगा और निगरानी रखी जाएगी. उन्होंने सभी एसडीएम को निर्देश दिए है कि अपने-अपने क्षेत्रों में डीजल को ईंधन के इस्तेमाल करने वाली औद्योगिक इकाइयों का निरीक्षण करना सुनिश्चित करें और ईंधन की खरीदी नियमों के अनुसार हो रही है या नहीं इसकी जांच करें.
अनियमितता मिलने पर होगी कार्रवाई
उपायुक्त नेहा सिंह ने बताया कि जिले में ऐसी नौ औद्योगिक इकाइयां चिन्हित की गई हैं, जो बड़े पैमाने पर डीजल का उपयोग करती हैं. इनमें कुंडली, बहालगढ़, रेवली, खरखौदा, खानपुर और सेक्टर-12 स्थित इकाइयां शामिल हैं. इनमें किसी भी तरह की अनियमितता मिलने पर संबंधित इकाई के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.
अधिकारियों को दिए पेट्रोल पंपों पर निगरानी के निर्देश
बैठक में अधिकारियों को पेट्रोल पंपों की दिनभर की बिक्री पर नजर रखने के निर्देश दिए हैं. बैठक में कहा गया है कि यदि किसी पेट्रोल पंप पर डीजल और पेट्रोल की बिक्री अचानक से असामान्य वृद्धि दिखाई दे तो वहां तत्काल प्रभाव से ऑडिट और निरीक्षण किया जाए. साथ ही ये भी सुनिश्चित किया जाएगा कि पेट्रोल पंपों से अनधिकृत टैंकरों या व्यावसायिक संस्थानों को थोक मात्रा में ईंधन की आपूर्ति न हो.
पेट्रोल की अवैध बिक्री और तस्करी को पूरी तरह से रोकने के लिए शासन ने सभी क्षेत्रों में फ्लाइंग स्क्वाॅड की टीम बनाई हैं. इन टीमों में एसडीएम, तहसीलदार, नायब तहसीलदार और पुलिस के अधिकारी शामिल होंगे, जो लगातार फील्ड पर रहकर निगरानी करेंगे.
तेल कंपनियों को भी दिए निर्देश
उपायुक्त नेहा सिंह ने तेल कंपनियों को भी निर्देश दिए हैं कि पेट्रोल पंपों पर हाेने वाले सभी बड़े लेन-देन का डाटा जिला खाद्य एंव आपूर्ति विभाग का उपलब्ध कराया जाए, जिससे कालाबाजारी की किसी भी तरह की आशंका नहीं रहे और समय रहते जांच हो सके.
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