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DUSU चुनाव में खुली NSUI की पोल! कौन हैं दीपांशु शौकीन जिन्‍होंने बगावत के बाद जीता चुनाव

Deepanshu Shokeen

दीपांशु शौकीन

Deepanshu Shaukeen: दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्रसंघ के चुनाव में उपाध्यक्ष पद पर निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शौकीन ने जीत दर्ज कर ली है. उनकी जीत के बाद अब सबसे ज्यादा सवाल NSUI के टिकट वितरण को लेकर उठाए जा रहे हैं. ऐसा दावा किया जा रहा है कि खुद शौकीन के साथ-साथ ज्यादातर लोग चाहते थे कि दीपांशु को ही टिकट दिया जाए. आरोप है कि टिकट वितरण करने वालों ने इस बात पर कोई गौर नहीं किया. यही वजह है दीपांशु ने बगावत करते हुए निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला किया. साथ ही साथ इस चुनाव सबसे शानदार जीत दर्ज की है.

उपाध्यक्ष पद पर निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शौकीन ने जीत दर्ज की है. उन्हें 27,501 वोट मिले हैं. ABVP के ईशु मौर्य को 14,506 और NSUI के वीर छत्रथ को 3,827 वोट मिले हैं. कुल मिलाकर काउंटिंग की शुरुआत से ही दीपांशु आगे चल रहे थे.

कौन हैं दीपांशु शौकीन?

दीपांशु शौकीन के राजनीति में आने की बात की जाए तो उन्‍होंने चुनाव लड़ने का फैसला सत्य निकेतन हादसे के बाद किया था. तभी उन्‍होंने तय किया था. जब तक बच्‍चों को न्याय नहीं मिल जाता वह चप्पल नहीं पहनेंगे.

दीपांशु शौकीन के पिता बस कंडक्टर हैं, जबकि मां आंगनवाड़ी कार्यकर्ता हैं. शौकीन ने भगत सिंह कॉलेज से ग्रेजुएशन की पढ़ाई की है और फिलहाल डिपार्टमेंट ऑफ बुद्धिस्ट स्टडीज के छात्र हैं. पढ़ाई में तेज माने जाने वाले शौकीन के पिता चाहते थे कि वह UPSC की तैयारी करें. अब देखना होगा कि शौकीन परिवार का सपना पूरा करते हैं. या फ‍िर फुल टाइम राजनीति करेंगे.

बुरी हार के लिए NSUI खुद ही ज‍िम्‍मेदार?

दिल्ली छात्रसंघ चुनाव में NSUI की तरह की हार के बाद अब सबसे ज्यादा सवाल टिकट वितरण पर ही उठ रहे हैं. लोगों का यहां तक कहना है कि जानबूझकर ऐसे लोगों को टिकट नहीं द‍िया गया जो चुनाव जीत सकते हैं. यही वजह है कि उन्‍होंने बगावत करते हुए NSUI को अच्छा खास नुकसान पहुंचाया है.

लोगों का यह भी कहना है कि अगर जंतर मंतर जैसे आंदोलन और सत्य निकेतन जैसी घटना के बावजूद आप नहीं जीत पाए , आपके बाग़ी जीत जाएं तो ये टिकट वितरण में घोर गलती की गई है. अब लोग सवाल उठा रहे हैं कि जीतने वाले उम्मीदवार को टिकट न देना किसका फैसला था ?

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