भारत के करोड़ों बच्चों पर मंडरा रहा कुपोषण का खतरा, अल-नीनो को लेकर UNICEF का डेटा आया सामने
El Niño crisis India: दुनिया भर में बदलते मौसम का असर अब बच्चों के भविष्य पर भी साफ दिखाई देने लगा है. संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) की एक हालिया रिपोर्ट में चेतावनी दी है कि अल नीनो जैसी जलवायु घटनाओं के कारण भारत के करोड़ों बच्चे गंभीर संकट का सामना कर सकते हैं. रिपोर्ट के अनुसार देश में लगभग 41 करोड़ बच्चे ऐसे क्षेत्रों में रहते हैं, जहां सूखा, भीषण गर्मी और पानी की कमी जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ सकती हैं.
अल नीनो को लेकर एक्सपर्ट का कहना है कि अल नीनो के प्रभाव से कई इलाकों में सामान्य से कम बारिश हो सकती है. इसका सीधा असर खेती, जल स्रोतों और खाद्य उत्पादन पर पड़ेगा.
आगे कहा कि यदि बारिश कम हुई तो किसानों की फसलें प्रभावित होंगी, जिससे खाद्यान्न की उपलब्धता और कीमतों पर भी असर पड़ सकता है. इसका सबसे ज्यादा प्रभाव गरीब और ग्रामीण परिवारों के बच्चों पर पड़ने की आशंका है.
रिपोर्ट में क्या-क्या कहा गया?
रिपोर्ट में बताया गया है कि बढ़ती गर्मी बच्चों के स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा बन रही है. छोटे बच्चों का शरीर अत्यधिक तापमान को वयस्कों की तुलना में कम सहन कर पाता है. इससे हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन, कुपोषण और कई अन्य बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. स्कूल जाने वाले बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित हो सकती है, क्योंकि कई क्षेत्रों में गर्मी के कारण स्कूल बंद करने की नौबत आ जाती है.
किन इलाकों को जताया डर
विशेष चिंता उन इलाकों को लेकर जताई गई है जहां पहले से ही पानी की कमी और गरीबी जैसी समस्याएं मौजूद हैं. वहां रहने वाले परिवारों के लिए हालात और कठिन हो सकते हैं. UNICEF ने सरकारों और स्थानीय प्रशासन से बच्चों को जलवायु संकट के प्रभावों से बचाने के लिए विशेष योजनाएं बनाने की अपील की है.
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते जल संरक्षण, हरित विकास और बच्चों की सुरक्षा से जुड़े कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले वर्षों में मौसम संबंधी आपदाएं नई पीढ़ी के स्वास्थ्य और भविष्य पर गहरा असर छोड़ सकती हैं. भारत समेत कई देशों के लिए यह चेतावनी है कि जलवायु परिवर्तन अब केवल पर्यावरण का नहीं, बल्कि बच्चों के जीवन और विकास का भी बड़ा मुद्दा बन चुका है.
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