Sonipat Elderly Father Shivcharan Death: एक पिता और बेटी का रिश्ता दुनिया के सबसे खूबसूरत रिश्तों में गिना जाता है, लेकिन बदलते समय में यही रिश्ता कई सवालों के घेरे में भी दिखाई देता है. हरियाणा के सोनीपत के शिवचरण की कहानी भी कुछ ऐसे ही सवाल खड़े करती है. शिवचरण की मौत सोनीपत के वृद्धाश्रम में मौत हो गई थी. वे एक समय पर मुंबई में कपड़े का व्यापार किया करते थे.
शिवचरण की तीन बेटियां हैं, जिनको पढ़ाने लिखाने के लिए उन्होंने एक समय पर दिन-रात मेहनत की थी. लेकिन ये नहीं पता था कि बुढ़ापे में उनका कोई सहारा नहीं होगा. ऐसा इसलिए क्योंकि पिता की मौत की जानकारी जब बेटियों को दी गई तब उन्होंने समय न होने और दूर होने का हवाला दिया.
अंतिम संस्कार नहीं आई बेटियां
तीनों ही बेटियों ने अंतिम संस्कार में शामिल होने से साफ तौर पर इनकार कर दिया. यह सुनकर हर कोई हैरान हो गया. यहां तक की यहां तक की तीनों बेटियां अस्थियां लेने भी नहीं पहुंची. इसके लिए उन्होंने आश्रम संचालक को 5100 रुपये भेजकर कहा कि ‘सोनीपत में ही पिता का अंतिम संस्कार कर दो.’ वीडियो कॉल के जरिए बेटियों ने पिता के अंतिम दर्शन किए.
पिता की इच्छा रही अधूरी
शिवचरण की उम्र 74 थी, वह अपनी जिंदगी का अंतिम समय सोनीपत के एक वृद्धाश्रम में गुजार रहे थे. उनकी बेटियों के न पहुंचने पर वृद्धाश्रम के लोग भी हैरान रहे. उन्होंने बताया कि शिवचरण के पास एक मोबाइल था. जब भी मोबाइल की घंटी बजती थी. उन्हें यही लगता था कि उनकी बेटियों का कॉल होगा. इसके साथ ही वे कॉल करके पिता का हाल चाल लेंगी. लेकिन, अफसोस कि बेटियों ने न तो हालचाल लिया और न ही अंतिम संस्कार में शामिल हुई.
शिवचरण की मौत ने खड़े किए कई सवाल
शिवचरण की कहानी भावुक जरूर करती है, लेकिन साथ ही यह सोचने पर मजबूर भी करती है कि आधुनिक जीवन की दौड़ में कहीं हम अपने सबसे जरूरी रिश्तों को पीछे तो नहीं छोड़ रहे. शिवचरण गुप्ता की बड़ी बेटी नेपाल में रहती है. छोटी बेटी यूपी के आजमगढ़ में रहती है. सबसे छोटी बेटी मुंबई में ही रहती है. निधन के बाद भी शिवचरण दो जरूरतमंद लोगों की आंखों की रोशनी बनने का माध्यम बन गए. क्योंकि उन्होंने अपनी आंखें पहले ही दान कर दी थीं.
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