India React US 100 Percent Tariff Threat: अमेरिकी संसद के निचले सदन यानी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में एक बड़ा बिल पास हुआ है. जिसमें रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाने का प्रावधान है. इस बिल में रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100% तक एक्स्ट्रा टैरिफ लगाने का प्रावधान है. इसका असर भारत पर भी पड़ सकता है. बिल पास होने के बाद भारतीय विदेश मंत्रालय का भी बयान सामने आया है. भारत ने कहा है कि देश अपनी ऊर्जा जरूरतों और व्यापारिक हितों की रक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाएगा.
विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत अपने 1.4 अरब लोगों को ध्यान में रखकर फैसला करेगा. विदेश मंत्रालय ने कहा कि ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए अलग-अलग देशों से तेल और गैस खरीदना जारी रखेगा. मंत्रालय के मुताबिक, ऊर्जा की खरीद बाजार की स्थिति और देश के हितों को ध्यान में रखकर की जाएगी.
भारत ने क्या कहा?
भारत ने यह भी साफ किया कि वह अपने व्यापार और आर्थिक हितों की रक्षा के लिए जरूरी कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा. सरकार इस पूरे मामले के असर को समझने और उससे निपटने के लिए भारतीय कारोबार और उद्योग जगत के साथ मिलकर काम करेगी. विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत अमेरिकी कांग्रेस में बिल पास होने के बाद इस मामले में आगे होने वाले घटनाक्रम पर नजर रख रहा है.
262-159 वोटों से पास हुआ बिल
अमेरिकी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026’ को 262-159 वोटों से मंजूरी दी है. इससे अमेरिकी राष्ट्रपति प्रशासन को रूस से तेल खरीदने वाले कुछ प्रमुख देशों पर 100% तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने का अधिकार मिल सकता है.
रूस से भारत सबसे ज्यादा तेल खरीदता
रूस अभी भी भारत के लिए कच्चे तेल का सबसे बड़ा स्रोत बना हुआ है. जुलाई में भारत के कुल कच्चे तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी करीब 51.1% थी. यह हिस्सा UAE, सऊदी अरब, वेनेजुएला, ब्राजील, ओमान और अमेरिका से होने वाले आयात को मिलाकर भी ज्यादा था.
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