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पाकिस्तान में मचेगी खलबली! भारत की तीसरी सबसे घातक पनडुब्बी ‘INS अरिधमन’ तैयार, जानें खासियत

INS Aridhaman K-4 ballistic missile

पनडुब्बी 'INS अरिधमन' तैयार

INS Aridhaman: भारत लगातार अपनी सैन्य शक्तियों को मजबूत करने के लिए प्रयास कर रहा है. भारतीय नौसेना भी अपनी सैन्य शक्ति और परमाणु प्रतिरोधक क्षमता को नई ऊंचाई पर ले जाने के लिए तैयार है. भारत को बहुत जल्द दुनिया की तीसरी स्वदेशी परमाणु-सक्षम पनडुब्बी (SSBN), INS अरिधमन (S4) मिलने वाली है. अप्रैल-मई तक इन पनडुब्बी के नौसेना में शामिल होने की संभावना है. इसके संकेत दिसंबर 2025 में भारतीय नौसेना एडमिरल डी. के. त्रिपाठी ने दिए थे.

भारतीय नौसेना के बेडे़ में INS अरिधमन शामिल होने के बाद पहली बार भारत में तीन परिचालन परमाणु पनडुब्बियां होंगी. INS अरिधमन पनडुब्बी बहुत खास रहने वाली है. यह भारत को ‘कंटीन्यूअस एट-सी डिटरेंस’ की रणनीति हासिल करने के करीब ले जाएगा. यानी कि अब हमेशा भारत की 1 पनडुब्बी समुद्र में गश्त करने के लिए तैनात रहेगी. फिलहाल, पनडुब्बी अपने समुद्री परीक्षणों के अंतिम चरण पर है. बहुत जल्द यह तैनात होने वाली है.

क्या है INS अरिधमन की खासियत?

INS अरिधमन भारत में मौजूद पनडुब्बियों की तुलना में काफी घातक और एडवांस्ड टेक्नालॉजी के साथ है. भारत के पास अभी INS अरिहंत और INS अरिघात मौजूद है. INS अरिधमन का वजन भी पिछली पनडुब्बियों की तुलना में काफी ज्यादा है. इसका वजह 7,000 टन है. इसके साथ ही यह K-4 बैलिस्टिक मिसाइलों से लैस रहे, जिसकी मारक क्षमता लगभग 35,00 किलोमीटर रहने वाली है. इतना ही नहीं यह अपने साथ 24 K-15 ‘सागरिका’ मिसाइलों (750 किमी. रेंज) को भी ले जा सकती है.

पाकिस्तान की उड़ जाएगी नींद

भारत लगातार सैन्य शक्ति पर फोकस रखते हुए काम कर रहा है. INS अरिधमन को भी जल्द ही नौसेना के बेडे़ में शामिल कर रहा है. पहले ही पाकिस्तान को भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत सबक सिखा चुका है और अपनी ताकत का अहसास करा चुका है. INS अरिधमन के आने के बाद पाकिस्तान की नींद उड़ जाएगी. INS अरिधमन को टक्कर देने के लिए पाकिस्तान ने भी चीन से $5 बिलियन के सौदे को मंजूरी दी है. जिसमें 8 पनडुब्बियां खरीदी जाएंगी.

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INS अरिधमन के अलावा भारत रूस से भी एक अकुला-क्लास परमाणु हमलावर पनडुब्बी (चक्र-III) को भी लीज पर लेने की तैयारी में है, संभावना है यह लगभग 2027-28 तक भारत आ सकती है. जर्मनी से भी समझौता लगभग अंतिम चरण पर ही है.

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