Kudankulam Nuclear Plant: भारत के सबसे बड़े कुडनकुलम न्यूक्लियर पावर प्लांट से जुड़े कुछ अहम दस्तावेज कथित तौर पर डार्क वेब पर लीक होने का मामला सामने आया है. इस तरह का दावा किया जा रहा है कि यह डेटा साइबर फ्रॉड करने वाले एक ग्रुप वर्ल्ड लीक्स ने जारी किया है. इसमें प्लांट के कुछ हिस्सों के ब्लूप्रिंट, सप्लायरों की जानकारी और निर्माण से जुड़े दस्तावेज शामिल बताए जा रहे हैं.
रिपोर्ट के अनुसार, ये दस्तावेज बिजनेसमैन अनिल अंबानी के रिलायंस ग्रुप से जुड़े सर्वर से हासिल किए गए हैं. रिलायंस ग्रुप ने भी स्वीकार किया है कि उसके एक थर्ड-पार्टी डेटा सेंटर के सर्वर में आंशिक डेटा ब्रीच हुआ है.
हालांकि कंपनी ने यह स्पष्ट नहीं किया कि कौन-कौन सा डेटा प्रभावित हुआ.साथ ही सरकार और संबंधित एजेंसियों को इसकी जानकारी दे दी गई है.
किस तरह का डेटा हुआ लीक
राहत की बात यह है कि अब तक ऐसी कोई जानकारी सामने नहीं आई है, जिससे यह लगे कि परमाणु संयंत्र के रिएक्टर या उसके मुख्य संचालन तंत्र पर कोई असर पड़ा है.शुरुआती जानकारी के मुताबिक लीक हुए दस्तावेज निर्माण और आपूर्ति से जुड़े हैं, न कि संयंत्र के संवेदनशील नियंत्रण सिस्टम से जुड़े हैं.
साइबर एक्सपर्ट का कहना है कि इस तरह की जानकारी सार्वजनिक होना चिंता का विषय है.भले ही रिएक्टर सिस्टम सुरक्षित हों, लेकिन ब्लूप्रिंट, सप्लायरों की सूची और तकनीकी दस्तावेज गलत हाथों में पहुंचने से सुरक्षा जोखिम बढ़ सकते हैं.
कौन कर रहा पूरे मामले की जांच
घटना की जांच भारतीय कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (CERT-In) और अन्य संबंधित एजेंसियां कर रही हैं.वे यह पता लगाने में जुटी हैं कि डेटा कितना लीक हुआ और इसका संभावित असर क्या हो सकता है.
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब देश में साइबर हमलों और डेटा चोरी की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं.विशेषज्ञों का मानना है कि महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे से जुड़े संस्थानों और उनके ठेकेदारों को अपनी साइबर सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत करने की जरूरत है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं से बचा जा सके.
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