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प्रसाद हो तो ऐसा! पंजाब में 100 पुरानी परंपरा, मन्नत पूरी होने पर शराब का लगता है लंगर

लाइन में लगकर लोग लेते हैं प्रसाद

लाइन में लगकर लोग लेते हैं प्रसाद

Ludhiana Alcohol Langar: देश दुन‍िया के हर रोज हजारों लंगर लगाए जाते हैं. जहां लोगों की भूख मिटाने के लिए खाना वितरित किया जाता है, जिसे आम भाषा में प्रसाद कहा जाता है. लेकिन, पंजाब के लुधियाना में एक ऐसा लंगर लगा कि लोग खुद कहने लगे प्रसाद हो तो ऐसा. जी हां यहां पर मन्नत पूरी होने के शराब का लंगर लगाया गया. स्‍थानीय लोगों की मानें तो इस तरह की परंपरा करीब 100 सालों से चली आ रही है.

लुधियाना में जगराओं के काउंके कला स्थित बाबा रोडे शाह की दरगाह पर शराब का लंगर लगाया गया. स्‍थानीय लोगों की मानें तो मन्नत पूरी होने के लोग शराब की बोतले चढ़ाते हैं. इन्हीं शराब की बोतलों को एक साथ खोलकर लोगों को प्रसाद के तौर पर वितरित किया जाता है.

इस तरह का आयोजन अलग-अलग जगहों पर स्टॉल लगाकर किया जाता है. यहां लोग लाइन में लगकर प्रसाद लेते हैं. खास बात यह है कि प्रसाद लेने के लिए महिला और पुरुषों का दिन भी फिक्‍स है. यानी जिस दिन महिलाओं को प्रसाद वितरित किया जाएगा. उस दिन पुरुषों को प्रसाद नहीं मिलेगा.

बाबा रोडे शाह खुद शराब नहीं पीते थे शराब

इस साल यह सालाना मेला 5 से 7 सितंबर तक चला है. जिसमें दूर दूर से लोग शराब लेकर पहुंचे थे. कई लोग बोतले तो कई लोग शराब की पेटियां वितरित करने पहुंचे थे. खास बात यह है कि बाबा रोडे शाह खुद शराब नहीं पीते थे. मतलब जिस दरगाह पर शराब प्रसाद के तौर पर बांटी जा रही है. वहां के बाबा ने कभी शराब को हाथ भी नहीं लगाया.

कैसे शुरू हुई यह परंपरा?

स्‍थानीय लोग बताते हैं कि सालों पहले यहां एक दंपत्ति संतान सुख यानी कि उसे बच्चा नहीं हो रहा था. उसकी कामना थी कि उसको एक बच्चा हो जाए. बाबा के आशीर्वाद से उन्‍हें एक बच्चा हो गया. इससे खुश होकर दंपत्ति दोबारा बाबा के पास पहुंचे. इस बार भेंट के तौर पर वह अपने साथ शराब लेकर पहुंचे. चूंकि बाबा शराब पीते नहीं थे, तो उन्‍होंने वहां मौजूद लोगों वह शराब बांट दी. उसके बाद से ही यह सिलसिला शुरू हो गया. आज भी मन्नतें पूरी होने के बाद लोग वहां शराब चढ़ाते हैं. 

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