Meta Admits Mistakes On Deepfakes: मार्क जकरबर्ग ने CSAM (बच्चों के यौन शोषण से जुड़ा कंटेंट), डीपफेक कंटेंट और प्लेटफॉर्म चलाने में हुई गलतियों के लिए माफी मांगी है. उन्हें साफ तौर पर बताया गया कि वे ‘इंटरमीडियरी’ (मध्यस्थ) की परिभाषा के दायरे में नहीं आते हैं. वे खुद तय करते हैं कि कंटेंट किसे मिलेगा. IT एक्ट के तहत ‘सेफ हार्बर’ (सुरक्षा कवच) का नियम उन पर लागू नहीं होता है.
जकरबर्ग ने माफी मांगते हुए अपनी गलतियों पर भी खेद व्यक्त किया है. उन्होंने खुद स्वीकार किया है कि कुछ खास प्रकार के कंटेंट को बढ़ावा देने के लिए भारी पैसों का भुगतान किया गया था. सरकारी अधिकारियों ने मेटा को बताया था कि वह आईटी अधिनियम के तहत इंटरमीडियरी की परिभाषा के दायरे में नहीं आती है.
मार्क ज़करबर्ग ने CSAM (बच्चों के यौन शोषण से जुड़ा कंटेंट), डीपफेक कंटेंट और प्लेटफॉर्म चलाने में हुई गलतियों के लिए माफी मांगी।
— ANI_HindiNews (@AHindinews) August 5, 2026
उन्हें साफ तौर पर बताया गया कि वे 'इंटरमीडियरी' (मध्यस्थ) की परिभाषा के दायरे में नहीं आते हैं। वे खुद तय करते हैं कि कंटेंट किसे मिलेगा। IT एक्ट के… pic.twitter.com/GV8CcisrZe
मेटा ने कहा कि आईटी एक्ट के तहत सेफ हार्बर उन पर लागू नहीं होता है. बता दें, सेफ हार्बर एक ऐसा कानूनी प्रावधान है, जो सोशल मीडिया और इंटरनेट कंपनियों को उनके प्लेटफॉर्म पर यूजर्स की तरफ से डाले जाने वाले कंटेंट के लिए कानूनी जिम्मेदारी से छूट देता है.
ये भी पढ़ेंः पीएम मोदी के खिलाफ अभद्र टिप्पणी का मामला, नोएडा की नाबालिग के खिलाफ शिकायतकर्ता ने वापस ली FIR
अश्विनी वैष्णव से हुई थी 30 मिनट मुलाकात
मेटा के चीफ ग्लोबल अफेयर्स ऑफिसर जोएल कपलान ने आज इलेक्ट्रॉनिक्स और IT मिनिस्टर अश्विनी वैष्णव से अपनी टीम के साथ मुलाकात की है. उनके साथ करीब 30 मिनट तक बातचीत चली. इससे पहले मेटा के अधिकारियों ने MeitY सेक्रेटरी एस. कृष्णन से भी मुलाकात की थी.
