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’10 बच्चे पैदा करो, तभी…’, मौलाना साजिद रशीदी की हिंदुओं को सलाह, क्‍या-क्‍या कहा?

Maulana Sajid Rashidi

साजिद रशीदी

Maulana Sajid Rashidi Statement: ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी अक्‍सर अपने बयानों के कारण चर्चा में बने रहते हैं. लगभग हर बार उनके बयान विवाद‍ित ही रहते हैं. जिनकी वजह से कई बार व‍िवाद भी सामने आया है. अब एक बार फ‍िर उन्‍होंने बच्‍चे पैदा करने को लेकर हिंदू को सलाद दी है. उन्‍होंने कहा कि 10 बच्चे पैदा करो, तभी बराबरी हो सकती है.

मौलाना साजिद रशीदी ने मुस्‍ल‍िम समुदाय का उदाहरण देते हुए बताया कि हमारे यहां लगभग हर मुस्‍ल‍िम के 5-6 बच्‍चे होते हैं. कई परिवार तो आज भी 8-8 बच्‍चे पैदा कर रहे हैं. पहले यही संख्‍या में 10 के ऊपर हुआ करती थी. उन्‍होंने हिंदू समुदाय पर निशाना साधते हुए कहा कि कम से कम दस पर तो आओ.

मौलाना ने आगे कहा कि हमारा अकीदा (विश्वास) यह है कि बच्चों को उपरवाला खिलाता है और मां-बाप उसका सिर्फ जरिया है,हिंदू परिवारों में बच्चों की पढ़ाई-लिखाई और परवरिश के खर्च को लेकर चिंता की जाती है. यही वजह है कि लोग ज्यादा बच्चे पैदा नहीं करते हैं.

हमारे बराबर तो आओ- मौलाना

मौलाना साज‍िद ने कहा कि लोग औरतों को बच्‍चे पैदा करने की मशीन कहते हैं. हम उनसे यही कहना चाहते हैं कि शीन समझ रहे हो और फिर पांच ही क्यों दस करो न, हमारे बराबर तो आओ. तभी बराबरी होगी. उन्होंने कहा कि इस्लाम में बच्चा पैदा करने पर हम रोक नहीं लगा सकते.

वृद्धाश्रमों को लेकर क्‍या बोले रशीदी

रशीदी यही नहीं रुके उन्‍होंने वृद्धाश्रमों का जिक्र भी किया. कहा कि बच्‍चे पढ़-लिखकर बच्चे मां-बाप को वृद्धाश्रम में छोड़ देते हैं. इसके बाद वह अकेले अपनीपत्नी के साथ रहते हैं. ऐसा ज्‍यादातर हिंदू परिवारों में ही होता है. उन्होंने यहां तक दावा किया कि मुस्लिम परिवारों में ऐसा नहीं होता है. बच्चे अपने मां-बाप को वृद्धाश्रम में नहीं छोड़ते हैं. उनके साथ ही रहकर उनका ख्‍याल रखते हैं.

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