Delhi Pellet Gun Firing: देश की राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर लगभग 40 दिनों तक विरोध प्रदर्शन चला. इसी दौरान 20 जुलाई को प्रदर्शकारियों की तरफ से संसद मार्च किया गया था. हालांकि पुलिस से झड़प के बाद लाठीचार्ज को टियर गैस का इस्तेमाल किया गया. इसके कारण बड़ी संख्या में लोग घायल हुए. आरोप है कि संसद मार्च के दौरान ही पैलेट गन का इस्तेमाल किया गया था, जिसमें 3 लोग बुरी तरह से घायल हो गए. इनके से एक की आंख खराब हो चुकी है. राहुल गांधी ने भी इसको लेकर गृहमंत्री को पत्र लिखा है. अब इस मामले में बड़ा खुलासा हुआ है.
सूत्रों के मुताबिक आरएएफ जवानों ने 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान पेलेट गन से फायरिंग की थी. इसके कारण ही छात्र घायल हुए हैं. हालांकि अब तक इस मामले में किसी भी सुरक्षा बल एजेंसी की तरफ से आधिकारिक तौर पर नहीं कहा गया है. लेकिन, सूत्रों की माने तो यह तय हो गया है कि आएएफ के जवानों ने पैलेट गन का इस्तेमाल किया था.
सीआरपीएफ कर रही पूरे मामले की जांच
सीआरपीएफ डीजी जीपी सिंह के मुताबिक, किन परिस्थितियों में फायरिंग की गई थी और क्या जवानों ने एसओपी का पालन किया था? उसकी फिलहाल जांच की जा रही है. ऐसा माना जा रहा है कि अगले अगले एक-दो दिन में सीआरपीएफ की तरफ से पूरे प्रकरण पर एक आधिकारिक बयान जारी किया जाएगा. जिसके बाद तय हो जाएगा कि आखिर यह पैलेट गन क्यों चलाई गई थी.
राहुल गांधी ने गृहमंत्री को लिखा पत्र
कांग्रेस नेता राहुल गांधी इस मामले में सख्त नजर आ रहे हैं. उन्होंने पैलेट गन में घायल हुए छात्रों से मुलाकात की. इसके साथ ही वह उन्हें मीडिया के सामने भी लाए. इस दौरान उन्होंने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि आखिर किसके ऑर्डर पर यह पैलेट गन चलाई गई थी. उन्होंने कहा कि किसी भी लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन बेहद महत्वपूर्ण होता है . उन्होंने दावा किया कि इस कार्रवाई में सैकड़ों छात्र घायल हुए और महिला प्रदर्शनकारियों के साथ भी कथित तौर पर दुर्व्यवहार किया गया.
