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गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि बुलाने की परंपरा कब और क्यों शुरू हुई? जानिए पहले विदेशी मेहमान कौन थे

Ursula von der Leyen And Antonio Costa

उर्सुला वॉन डेर लेयेन और एंटोनियो कोस्टा

Republic Day 2026: इस साल भारत अपना 77वां गणतंत्र दिवस मना रहा है. गणतंत्र दिवस के इस पावन अवसर पर हर साल देश के कोने-कोने में आजादी और लोकतांत्रिक व्यवस्था की गूंज सुनाई देती है. पिछले कई सालों से आपने यह खबर जरूर पढ़ी या देखी होगी कि गणतंत्र दिवस के मौके पर एक खास विदेशी मेहमान को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया जाता है. ऐसे में हर भारतीय के मन में यह सवाल उठता है कि आखिर हर साल 26 जनवरी की परेड में एक विदेशी चेहरा क्यों देखने को मिलता है.

भारत अपने इस गौरवशाली दिन पर बाहरी मेहमान को आमंत्रित कर आखिर क्यों सम्मानित करता है? बता दें कि यह परंपरा इस वर्ष से नहीं, बल्कि आजादी के शुरुआती वर्षों से ही चली आ रही है. ऐसे में आइए जानते हैं इसके पीछे के गौरवशाली इतिहास के बारे में.

26 जनवरी पर चीफ गेस्ट को क्यों बुलाया जाता है?

भारत में गणतंत्र दिवस हर साल 26 जनवरी को मनाया जाता है, क्योंकि इसी दिन साल 1950 में देश का संविधान लागू हुआ था और भारत एक लोकतांत्रिक गणराज्य बना था. साल 1950 में ही एक विशेष परंपरा की शुरुआत हुई, जिसके तहत गणतंत्र दिवस के अवसर पर एक विशिष्ट विदेशी नेता को ‘मुख्य अतिथि’ के रूप में आमंत्रित किया जाने लगा. तब से भारत हर साल गणतंत्र दिवस की परेड में शामिल होने के लिए एक खास विदेशी मेहमान को बुलाता है. इस परंपरा का मुख्य उद्देश्य अपने लोकतांत्रिक मूल्यों को प्रदर्शित करने के साथ-साथ अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मैत्रीपूर्ण संबंधों और सहयोग को मजबूत करना है.

पहले विदेशी मेहमान कौन थे?

साल 1950 में जब भारत अपना पहला गणतंत्र दिवस मना रहा था, तब उस समय बतौर विदेशी मेहमान इंडोनेशिया के राष्ट्रपति ‘सुकर्णो’ को आमंत्रित किया था. उस समय परेड का पहला आयोजन दिल्ली के इर्विन स्टेडियम में हुई थी, जिसका नाम बदलकर दादा ध्यानचंद स्टेडियम रख दिया गया और आज हम इसे इसी नाम से जानते हैं. सुकर्णो को बुलाने का यह मकसद यह न्योता एशिया के नवस्वतंत्र देशों के बीच दोस्ती और एकजुटता का प्रतीक माना गया.

किस साल विदेशी मेहमान नहीं आए थे?

बता दें कि साल 1952 और 1953 के गणतंत्र दिवस पर भारत ने किसी विदेशी मेहमान को आमंत्रित नहीं किया था, क्योंकि उस समय देश कई आंतरिक और अंतरराष्ट्रीय समस्याओं से गुजर रहा था. इसके बाद 1955 का साल एक महत्वपूर्ण पड़ाव रहा, जब गणतंत्र दिवस की परेड को स्थायी रूप से ‘राजपथ’ पर आयोजित करने का निर्णय लिया गया. उसी साल पाकिस्तान के तत्कालीन गवर्नर-जनरल मलिक गुलाम मोहम्मद इस समारोह के मुख्य अतिथि बने थे.

चीफ गेस्ट को कैसे चुना जाता है?

चीफ गेस्ट बुलाने से भारत पर क्या प्रभाव पड़ता है?

गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि का चयन मात्र एक औपचारिकता नहीं, बल्कि भारत की रणनीतिक कूटनीति का हिस्सा है. इसके माध्यम से भारत दुनिया को यह संदेश देता है कि वह किन देशों के साथ अपने संबंधों को अच्छा बना रहा है. मुख्य अतिथि का गणतंत्र दिवस पर आगमन उस देश के साथ भारत के बढ़ते भरोसे और भविष्य के मजबूत रिश्तों का प्रतीक माना जाता है.

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2026 में गणतंत्र दिवस के मुख्य अतिथि कौन होंगे??

भारत के 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर यूरोपीय संघ (EU) के दो सबसे प्रमुख नेता मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे. यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन 25 से 27 जनवरी 2026 तक भारत की राजकीय यात्रा पर रहेंगे.साथ ही इस यात्रा के दौरान वे न केवल गणतंत्र दिवस समारोह में शोभा बढ़ाएंगे, बल्कि भारत और यूरोपीय संघ के बीच होने वाले महत्वपूर्ण शिखर सम्मेलन में भी हिस्सा लेंगे, जो दोनों पक्षों के मजबूत होते रिश्तों का बड़ा संकेत है.

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