SAGA group Ponzi scam: नई दिल्ली. प्रवर्तन निदेशालय (ED), मुख्यालय नई दिल्ली ने धनशोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के प्रावधानों के तहत 13 अगस्त से 16 अगस्त 2026 के बीच मुंबई और भोपाल में समीर अग्रवाल और उनके सहयोगियों से जुड़े कई ठिकानों पर छापेमारी की. यह कार्रवाई लोनी अर्बन मल्टी-स्टेट क्रेडिट एंड थ्रिफ्ट को-ऑपरेटिव सोसायटी (LUCC) और अन्य संबद्ध सोसायटियों से जुड़े SAGA ग्रुप के 10,000 करोड़ रुपए से अधिक के पोंजी घोटाले के सिलसिले में की गई है.
तलाशी अभियान के दौरान ED ने आपत्तिजनक दस्तावेजों के अलावा 30 करोड़ रुपए से अधिक के शेयर, म्यूचुअल फंड, LIC पॉलिसी, बैंक बैलेंस और 9 लग्जरी गाड़ियां फ्रीज की हैं. इसके साथ ही, कार्रवाई में 1.53 करोड़ रुपए नकद, लगभग 35 लाख रुपये की विदेशी मुद्रा और 5.25 करोड़ रुपए मूल्य के सोने-चांदी के आभूषण व बुलियन भी जब्त किए गए हैं.
यूपी, एमपी समेत कई राज्यों में फैला था कारोबार
जांच में सामने आया है कि SAGA ग्रुप द्वारा 2009 से ही उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और अन्य राज्यों में फर्जी बैंकिंग ढांचे के जरिए जनता को रिकरिंग और फिक्सड डिपॉजिट में 3 से 5 साल में पैसे दोगुने-तिगुने करने का लालच दिया गया था. बिना किसी वास्तविक कारोबार के आकर्षक रिटर्न और गाड़ियों जैसे उपहारों का झांसा देकर जनता से 10,000 करोड़ रुपए से अधिक की ठगी की गई. शुरुआती निवेशकों को कुछ भुगतान करने के बाद अधिकांश राशि को प्रमोटर समीर अग्रवाल और उनके सहयोगियों ने हड़प लिया, जिसका उपयोग व्यक्तिगत लाभ और एजेंटों को कमीशन देने के लिए किया गया. जनता से मुख्य रूप से नकद में वसूली गई इस राशि को शेल कंपनियों और हवाला चैनलों के माध्यम से देश-विदेश में चल-अचल संपत्तियों में निवेश किया गया. इस साजिश में 50 से अधिक शेल कंपनियों के एक बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है.
SAGA ग्रुप के सीएमडी और मुख्य कर्ताधर्ता समीर अग्रवाल देश छोड़कर फरार चल रहे हैं. ED इस मामले में पहले ही दो प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर के तहत संपत्तियों को कुर्क कर चुकी है, 14 जुलाई 2026 को ग्रुप के एक प्रमुख पदाधिकारी रविशंकर तिवारी को गिरफ्तार किया और 24 जुलाई 2026 को विशेष न्यायालय के समक्ष अभियोजन शिकायत (Prosecution Complaint) भी दाखिल की है. इस हाई-प्रोफाइल मामले में आगे की जांच अभी जारी है.
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