Sharad Pawar Meet PM Modi: राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के प्रमुख शरद पवार ने मंगलवार को अपनी बेटी और सांसद सुप्रिया सुले के साथ संसद भवन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की. इस बैठक के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में नई चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है. इस मुलाकात की चर्चा इसलिए भी हो रही है. क्योंकि एक दिन पहले ही शरद पवार ने सीजेपी के प्रदर्शनारियों से मुलाकात की थी.
कई राजनीतिक विश्लेषक इस मुलाकात को भविष्य की संभावित रणनीति से जोड़कर देख रहे हैं, हालांकि पार्टी की ओर से फिलहाल किसी राजनीतिक बदलाव के संकेत नहीं दिए गए हैं.
कहा ये भी जा रहा है कि प्रधानमंत्री ऑफिस में दोनों नेताओं के बीच विभिन्न मुद्दों पर बातचीत हुई. मुलाकात के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने शरद पवार का गर्मजोशी से स्वागत किया. इस दौरान की तस्वीरें सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में कई तरह के कयास लगाए जाने लगे हैं.
क्यों बैठक की हो रही सबसे ज्यादा चर्चा?
दिलचस्प बात यह है कि इस बैठक से एक दिन पहले ही शरद पवार और सुप्रिया सुले ने जंतर-मंतर पहुंचकर मेडिकल प्रवेश परीक्षा से जुड़े कथित पेपर लीक मामले को लेकर प्रदर्शन कर रहे छात्रों के प्रति अपना समर्थन जताया था.
उन्होंने छात्रों की मांगों को गंभीरता से लेने की अपील करते हुए कहा कि सरकार को उनकी समस्याओं का समाधान निकालना चाहिए. पार्टी ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल भी उठाए हैं. शिक्षा मंत्री की जिम्मेदारी तय करने की मांग का समर्थन किया है.
किस बात की चर्चा तेज?
इधर, प्रधानमंत्री से मुलाकात के बाद यह चर्चा भी तेज हो गई है कि क्या शरद पवार का गुट भविष्य में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के साथ किसी तरह का राजनीतिक तालमेल बना सकता है. हाल के दिनों में पार्टी के कुछ नेताओं की महाराष्ट्र सरकार के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकातों ने भी इन अटकलों को हवा दी है.
सुप्रिया सुले की सफाई आई सामने
सुप्रिया सुले पहले ही साफ कर चुकी हैं कि उनकी पार्टी को भाजपा या NDA की ओर से किसी तरह का गठबंधन प्रस्ताव नहीं मिला है. उन्होंने यह भी कहा कि विभिन्न नेताओं के बीच होने वाली मुलाकातों को राजनीतिक नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए, क्योंकि कई बार प्रशासनिक और क्षेत्रीय विकास से जुड़े विषयों पर भी इस तरह की बैठकें होती हैं.
फिलहाल इस मुलाकात को लेकर किसी भी पक्ष की ओर से राजनीतिक समझौते या गठबंधन संबंधी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है. ऐसे में आने वाले दिनों में ही साफ हो सकेगा कि यह मुलाकात केवल शिष्टाचार थी या इसके पीछे कोई व्यापक राजनीतिक रणनीति भी है.
