Shehzad Poonawalla Resigns: भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने आज यानी कि 31 जुलाई को भारतीय जनता पार्टी का दामन छोड़ दिया है. फिलहाल उनके बीजेपी छोड़ने का कारण पर्सनल बताया जा रहा है. उन्होंने अपना इस्तीफा बीजेपी आलाकमान को सौंप दिया है.
हालांकि भारतीय जनता पार्टी की तरफ से अब तक पूनावाला के इस्तीफे को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है. मीडिया रिपोर्ट में शुक्रवार को यह जानकारी दी गई है.
पूनावाला ने गुरुवार को अपना बायो अपडेट किया, लेकिन इस फ़ैसले के पीछे कोई कारण नहीं बताया है. हालाँकि, पूनावाला खुद को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का “जीवन भर का समर्थक” बताते हैं. इसके साथ ही एक पुराना वीडियो शेयर करते हुए उन्होंने कहा कि बीजेपी किसी एक परिवार की पार्टी नहीं है, न ही वहां फैसले कोई एक लेता है. बाकी की हर पार्टी एक परिवार तक ही सीमित है.
Only a BJP can give you a self made person like Narendra Modi ji – the rest will only promote their children and dynasties.
— Shehzad Jai Hind (@Shehzad_Ind) July 31, 2026
Hence this BJP remains the best bet for the youth.. pic.twitter.com/1WUt4Vrxh9
My updated bio : pic.twitter.com/qGG5s9WMOG
— Shehzad Jai Hind (@Shehzad_Ind) July 30, 2026
कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में आए थे पूनावाला
शहजाद पूनावाला 9 साल पहले 2017 में कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में आए थे. उस समय कांग्रेस में अध्यक्ष पद चुनाव प्रक्रिया को लेकर उनका विवाद हुआ था. इसी के बाद उन्होंने कांग्रेस को अलविदा कह दिया था. BJP में शामिल होने के बाद, पूनावाला को राष्ट्रीय प्रवक्ता के पद पर नियुक्त किया गया था.
पूनावाला PM मोदी और BJP के कट्टर समर्थक रहे हैं और डिबेट व अन्य मंचों पर तीखे बयान देने के लिए जाने जाते हैं. उन्होंने सोशल मीडिया के ज़रिए बार-बार कांग्रेस और राहुल गांधी समेत उसके नेताओं की आलोचना की है. ऐसे में उनका बीजेपी छोड़ना कई तरह के सवाल खड़े कर रहा है.
सोशल मीडिया पर दिया था हिंट
पूनावाला के X अकाउंट पर हाल की कुछ पोस्ट में उन्होंने सक्रिय राजनीति से हटने का संकेत दिया था. उन्होंने अपने पुराने इंटरव्यू के कुछ क्लिप बिना किसी कैप्शन के शेयर किए थे, जिनमें उन्होंने राजनीति छोड़ने के बारे में बात की थी.
एक क्लिप में वे कह रहे हैं कि समस्या यह है कि हम राजनीतिक लक्ष्य को चुनावी लक्ष्य के साथ मिला देते हैं. ये दोनों अलग-अलग चीजें हैं. यह सोचना गलत है कि मैं समाज में योगदान तभी कर सकता हूं. जब मेरे चुनावी लक्ष्य पूरे हो जाएं,अगर मैं सांसद नहीं बनता, तो क्या इसका मतलब यह है कि समाज और राजनीति में मेरा कोई योगदान नहीं है? क्या मुझे अपनी सारी ऊर्जा इन पदों के पीछे भागने में लगानी चाहिए? मुझे लगता है कि हर किसी को सोचना चाहिए कि वे देश के लिए क्या योगदान दे सकते हैं. कुछ लोग चुने हुए प्रतिनिधि बनकर योगदान देते हैं, जबकि कुछ लोग इस सिस्टम से बाहर रहकर योगदान देने की कोशिश करते हैं. इसका मतलब यह नहीं है कि हम राजनीति से दूर हैं.
सोशल मीडिया पर वायरल यह वीडियो साल 2025 का बताया जा रहा है, यही वजह है कि लोगों के मन में सवाल उठ रहा है कि अब पूनावाला राजनीति से दूर हो चले हैं?
