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Explainer: क्या वाकई बिहार कांग्रेस के सभी 6 विधायक जेडीयू में शामिल होंगे? अटकलों पर पार्टी का आया बयान

Six Congress MLAs will join JDU Congress has called it a rumor bihar poliotics

लोकसभा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और बिहार सीएम नीतीश कुमार

Bihar Politics Explainer: कहा जाता है कि जहां आग हो, धुआं वहीं से उठता है. बिहार की सियासत में एक बार फिर दलबदल की चर्चाएं जोरों पर हैं. नवंबर 2025 के विधानसभा चुनाव में महज 6 सीटें जीतने वाली कांग्रेस अब विधानसभा से पूरी तरह गायब होने की कगार पर दिख रही है. अंग्रेज़ी अखबार इंडियन एक्सप्रेस की ‘पॉलिटिकल पल्स’ रिपोर्ट के अनुसार, राज्य के सभी छह कांग्रेस विधायक मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जनता दल (यूनाइटेड) के संपर्क में हैं और जल्द ही पार्टी बदल सकते हैं. यदि यह होता है, तो कांग्रेस बिहार विधानसभा में शून्य हो जाएगी, जो पार्टी के लिए बड़ा झटका होगा.

विस्तार न्यूज़ ने भी अपने सूत्रों के हवाले से इस ख़बर की पुष्टि की है. सूत्र ने यह ज़रूर बताया है कि कांग्रेस के विधायक पार्टी के वर्तमान कार्य-शैली से संतुष्ट नहीं हैं. राष्ट्रवाद संबंधी मुद्दों पर पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की चुप्पी से विधायक खुद को मिसफिट पा रहे हैं. हाल के दिनों में मुंबई महानगरपालिका के चुनाव में जिस तरह से मनसे ने बिहारियों को निशाना बनाया और राज ठाकरे ने सार्वजनिक मंचों से अपमानित भरे शब्दों का इस्तेमाल किया, उससे बिहार कांग्रेस के अधिकांश नेता आक्रोशित नजर आए. ख़ासकर विधायक बतौर जनप्रतिनिधि अपनी इस मुद्दे पर खुलकर कह भी नहीं पा रहे.

कौन-कौन से विधायक बदलेंगे पाला?

सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि कांग्रेस के विधायक मनोहर प्रसाद सिंह (मणिहारी), सुरेंद्र प्रसाद (वाल्मीकि नगर), अभिषेक रंजन (चनपटिया), आबिदुर रहमान (अररिया), मोहम्मद कामरुल होदा (किशनगंज) और मनोज बिस्वान (फॉरबिसगंज) नेतृत्व और संगठनात्मक कमजोरी से असंतुष्ट हैं. इसकी बानगी हाल के घटनाक्रम में बाखूबी दिखाई भी दी है. मकर संक्रांति पर सदाकत आश्रम में आयोजित पारंपरिक दही-चूड़ा भोज और ‘मनरेगा बचाओ’ अभियान की बैठक से सभी विधायक अनुपस्थित रहे. जेडीयू सूत्रों का कहना है कि ये विधायक पार्टी छोड़ने के लिए तैयार हैं और खरमास समाप्त होने के बाद घोषणा हो सकती है.

जेडीयू का एक तीर से कई निशाना

कांग्रेस विधायकों पर नज़र गड़ाए जेडीयू, गठबंधन के अंकगणित में ख़ुद को फ़ौलादी दिखाने की कोशिश में लगी है. यदि ये 6 विधायक जेडीयू में शामिल होते हैं, तो पार्टी की ताकत 85 से बढ़कर 91 हो जाएगी, जो भाजपा की 89 सीटों से अधिक होगी. इससे NDA में जेडीयू की स्थिति मजबूत होगी और भाजपा के साथ ‘बड़ी पार्टी’ वाली होड़ में बढ़त मिलेगी. NDA के अंदर भी एक-दूसरे पर बढ़त बनाने की कोशिशें जारी हैं. उधर, दांव-पेंच भिड़ाने का काम भाजपा की ओर भी जारी है. भाजपा भी राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) के तीन विधायकों को अपनी ओर खींचने में जुटी है.

कांग्रेस ने बताया अफवाह

कांग्रेस ने इन अफवाहों को सिरे से खारिज किया है. पूर्व कांग्रेस विधायक दल नेता शकील अहमद खान ने कहा, “हमारे विधायक कहीं नहीं जा रहे. वे अपने क्षेत्रों में व्यस्त थे, एक बैठक मिस करने से दलबदल की अफवाहें उड़ाना गलत है.” अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के बिहार प्रभारी और राष्ट्रीय सचिव शाहनवाज आलम ने इसे पूरी तरह झूठा करार दिया. उन्होंने आरोप लगाया कि NDA ये अटकलें फैलाकर कांग्रेस के ‘मनरेगा बहाली अभियान’ से ध्यान हटा रहा है, जिसे मोदी सरकार ने संसद के शीतकालीन सत्र में G RAM G Act से खत्म कर दिया था.

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शाहनवाज आलम ने कहा, “यह NDA की साजिश है ताकि विपक्ष को कमजोर दिखाया जा सके. हमारे विधायक पार्टी के साथ मजबूती से खड़े हैं.” ग़ौरतलब है कि बिहार में दलबदल की राजनीति पुरानी है, लेकिन कांग्रेस के लिए यह अस्तित्व का संकट बन सकता है. 2025 चुनाव में महागठबंधन का प्रदर्शन खराब रहा था, और कांग्रेस केवल 61 सीटों पर लड़कर 6 ही जीत पाई. फिलहाल कोई आधिकारिक दलबदल नहीं हुआ है, लेकिन राजनीतिक हलचल तेज है. स्थिति पर सभी की नजरें टिकी हैं.

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