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24 घंटे में 16 बार उगता-ढलता है सूरज, समझिए अंतरिक्ष में दिन-रात का खेल!

Solar Cycle Sunrise Sunset

प्रतीकात्मक तस्वीर

Solar Cycle Sunrise Sunset: क्या आपने कभी सोचा है कि अगर आप अंतरिक्ष में हों, तो आपका एक दिन कैसा होगा? हम धरती पर रोज़ एक सूरज उगते और एक सूरज ढलते हुए देखते हैं. लेकिन कल्पना कीजिए, अगर आप अंतरिक्ष में हों, ख़ासकर अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) में, तो आपके लिए सूरज सिर्फ़ एक बार नहीं, बल्कि पूरे 16 बार उगेगा और 16 बार ही ढलेगा. है न कमाल की बात?

कैसे होता है ये जादू?

ये कोई जादू नहीं, बल्कि विज्ञान है. अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पृथ्वी का चक्कर बहुत तेज़ी से लगाता है. इतनी तेज़ी से कि यह लगभग हर 90 मिनट में हमारी पृथ्वी का एक पूरा चक्कर लगा लेता है. इस विशाल प्रयोगशाला में वैज्ञानिक रिसर्च करते हैं.

अब आप खुद सोचिए, अगर ISS 90 मिनट में एक चक्कर पूरा कर लेता है, तो 24 घंटे में यह कितनी बार पृथ्वी के चारों ओर घूमेगा? जी हां, लगभग 16 बार. ISS की रफ्तार करीब 28,000 किलोमीटर प्रति घंटे की रहती है.

जब ISS पृथ्वी के चारों ओर घूमता है, तो यह लगातार उन हिस्सों से गुज़रता है जहां सूरज की रोशनी पड़ रही होती है (दिन) और उन हिस्सों से भी जहां अंधेरा होता है (रात). जैसे ही स्टेशन रोशनी वाले हिस्से से अंधेरे में जाता है, अंतरिक्ष यात्रियों को एक शानदार सूर्यास्त दिखाई देता है. और जैसे ही यह फिर से रोशनी वाले हिस्से में आता है, उन्हें एक खूबसूरत सूर्योदय देखने को मिलता है.

शुभांशु शुक्ला ने पीएम मोदी को भी बताई ये बात

हाल ही में इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) पहुंचकर इतिहास रचने वाले ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बातचीत के दौरान कई हैरान करने वाली बातें भी बताईं. उन्होंने बताया कि अंतरिक्ष से भारत बहुत भव्य दिखाई देता है. मैप में भारत को जितना बड़ा दिखाया जाता है उससे कहीं ज्यादा बड़ा यह वास्तविकता में नजर आता है. शुक्ला ने कहा कि यह केवल उनका सफर नहीं है बल्कि 140 करोड़ देशवासियों का सफर है.

उन्होंने पीएम मोदी को यह भी बताया कि पृथ्वी की कक्षा से हम रोज 16 बार सूर्यास्त और सूर्योदय देखते हैं. हमारा देश बहुत रफ्तार से आगे बढ़ रहा है.

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अंतरिक्ष यात्रियों का अनोखा अनुभव

धरती पर हम एक दिन में एक ही बार सुबह और शाम का नज़ारा देखते हैं, लेकिन ISS पर रहने वाले अंतरिक्ष यात्री हर 90 मिनट में एक नया सूर्योदय और सूर्यास्त देखते हैं. यह उनके लिए एक अनोखा और अविश्वसनीय अनुभव होता है. उन्हें लगातार बदलती हुई रोशनी और रंगों का अद्भुत खेल देखने को मिलता है, जो धरती से बिल्कुल अलग है. यह जानकर वाकई हैरान कर देने वाला है कि हमारे सिर के ऊपर अंतरिक्ष में कुछ लोग ऐसे भी हैं जो एक ही दिन में इतनी बार सूरज को उगते और ढलते हुए देखते हैं.

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