Sonam Wangchuk Hunger Strike: जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन और संसद मार्च के बाद शुरू हुआ बवाल खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है. तमाम राजनीतिक दलों के अपने-अपने मत हैं. इन सब के बीच सोनम वांगचुक ने अपने अनशन को खत्म करने की तरफ बड़ा इशारा किया है. उन्होंने इसके लिए सरकार को एक तरह से बड़ा ऑफर भी दिया है. यही वजह है कि अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या सरकार वांगचुक की मांग को मानती है?
सोनम वांगचुक ने संकेत दिया है कि यदि केंद्र सरकार आंदोलन में शामिल छात्रों और युवाओं के खिलाफ किसी भी प्रकार की कानूनी या दंडात्मक कार्रवाई न करने का स्पष्ट आश्वासन देती है, तो वह अपना जारी अनशन समाप्त करने पर विचार कर सकते हैं. उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य किसी टकराव को बढ़ाना नहीं, बल्कि छात्रों की आवाज़ को सुरक्षित रखना और उनकी मांगों को गंभीरता से सुना जाना है.
वांगचुक ने क्या कहा?
वांगचुक का कहना है कि इस आंदोलन में बड़ी संख्या में युवाओं ने शांतिपूर्ण तरीके से भाग लिया है. ऐसे में यदि उनके खिलाफ मुकदमे दर्ज किए जाते हैं या अन्य प्रकार की कार्रवाई होती है, तो इससे लोकतांत्रिक विरोध की भावना को नुकसान पहुंचेगा. उनका मानना है कि सरकार को यह भरोसा देना चाहिए कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले छात्रों को किसी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा.
लंबे समय से अनशन पर हैं वांगचुक
लंबे समय से जारी इस अनशन के कारण वांगचुक के स्वास्थ्य को लेकर भी चिंताएं बढ़ी हैं. चिकित्सकों की निगरानी में उनका इलाज चल रहा है. विभिन्न सामाजिक संगठनों के साथ-साथ आंदोलन से जुड़े लोगों ने भी उनसे स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए अनशन समाप्त करने की अपील की है.
बातचीत के जरिए निकाला जाए रास्ता
इस बीच आंदोलन से जुड़े प्रतिनिधियों ने भी स्पष्ट किया है कि उनकी लड़ाई केवल एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की है. उनका कहना है कि यदि सरकार सकारात्मक पहल करती है, तो बातचीत के माध्यम से समाधान का रास्ता निकाला जा सकता है.
वांगचुक ने दोहराया कि छात्रों के हितों की रक्षा और सरकार की स्पष्ट प्रतिबद्धता ही उनके अनशन समाप्त करने का आधार बनेगी. फिलहाल सभी की नजर सरकार की अगली प्रतिक्रिया पर टिकी हुई है, क्योंकि उसी के आधार पर आंदोलन की आगे की दिशा तय होने की संभावना है.
