‘बहू-बेटियों को बचाना है, हिंदू राष्ट्र जरूर बनेगा’, बागेश्वर धाम की सभा में ‘महाभारत’ के सितारे बोले- धर्म की रक्षा हमारा कर्तव्य है

वहीं महाभारत में दुर्योधन का किरदार निभाने वाले पुनीत भी बाबा बागेश्वर की सभा में पहुंचे. इस दौरान उन्होंने हिंदू की बेटियों से लव जिहाद में ना फंसने के लिए आगाह किया.
From the stage of Baba Bageshwar, the artists of Mahabharata demanded a Hindu nation.

बाबा बागेश्वर के मंच से महाभारत के कलाकारों ने हिंदू राष्ट्र की मांग की.

Mahabharat’s Actor in Bgeshwar Dham Sabha: प्रयागराज में आयोजित बागेश्वरधाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र शास्त्री की सभा में बीआर चोपड़ा की महाभारत के कई दिग्गज सितारे नजर आए. महाभारत में कृष्ण, अर्जुन, युधिष्ठिर और दुर्योधन का रोल अदा करने वाले सभी दिग्गज कलाकारों ने बागेश्वर धाम की सभा में शिरकत की. इस दौरान सभी ने राष्ट्रवाद और हिंदुत्व पर बात की. इसके साथ ही हिंदुओं से अपील करते हुए कहा कि हमको बहू-बेटियों को बचाना है. इसके लिए हिंदू राष्ट्र जरूरी है.

नीतीश भारद्वाज बोले- आज भी महाभारत चल रहा है

बीआर चोपड़ा के सीरियल महाभारत में श्रीकष्ण का रोल निभाने वाले नीतीश भारद्वाज ने कहा कि द्वापर में हमने महाभारत देखी थी. अगर द्वापर में महाभारत होती है, तो ये तो कलयुग है, यहां तो होनी ही है. लेकिन आज के समय में महाभारत अलग तरीके की है. भारत की सभ्यता और संस्कृति को देश में ही नहीं, विदेशी ताकते नष्ट करना चाहती हैं. हमको अपनी संस्कृति को बचाने के लिए महाभारत लड़नी है. हमको धर्म की रक्षा के लिए लड़ना है.

‘बहू-बेटियों को बहलाया जा रहा है’

वहीं महाभारत में दुर्योधन का किरदार निभाने वाले पुनीत भी बाबा बागेश्वर की सभा में पहुंचे. इस दौरान उन्होंने हिंदू की बेटियों से लव जिहाद में ना फंसने के लिए आगाह किया. पुनीत ने कहा कि बाबा बागेश्वर की इस तरह की सभाओं को देखकर लगता है कि आज भी हमारा धर्म और देश जागृत है. पुनीत ने कहा कि मैं अपनी बहन-बेटियों के साथ ही भाइयों को भी आगाह करता हूं कि अपने आसपास के लोगों से सतर्क रहें. कई लोग ऐसे हैं जो धर्मांतरण करवा रहे हैं. लव जिहाद में बेटियों को फंसा रहे हैं. हमको ऐसे लोगों से अलर्ट रहने की जरूरत है.

‘युधिष्ठिर’ बोले- राष्ट्र के लिए सबकुछ समर्पित

वहीं महाभारत में युधिष्ठिर का किरदार निभाने वाले गजेंद्र चौहान ने कहा कि हमको राष्ट्र के लिए समर्पित होना होगा. राष्ट्र से बढ़कर कुछ भी नहीं है. महाभारत ने हमको सिखाया है कि कोई भी रिश्ता चाहें वो भाई, पिता का हो या फिर कोई भी परंपरा या प्रतिष्ठा हो, ये राष्ट्र से बड़ी नहीं हो सकती है.

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