कानपुर में 3 बाबू बने चपरासी, टाइपिंग की स्पीड ने बिगाड़ा ‘खेल’, 1 मिनट में 25 शब्द टाइप नहीं कर पाने पर डिमोशन
कानपुर में 3 बाबुओं को कलेक्टर ने बना दिया चपरासी
Kanpur News: उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है, जो हर किसी को हैरान कर दिया. साथ ही सरकारी दफ्तरों की पोल खोल दी. जरा सोचिए, मोटी सैलरी पाने वाले बाबू एक मिनट में 25 शब्द भी टाइप नहीं कर पा रहे हैं. कलेक्टर ने उन पर कार्रवाई करते हुए डिमोशन कर चपरासी बना दिया. अब इस केस की काफी चर्चा हो रही है. जिलाधिकारी ने यह कार्रवाई करते हुए अन्य सभी शासकीय कर्मचारियों को संदेश देने का काम किया है. पढ़ें क्या है पूरा मामला?
कानपुर कलेक्ट्रेट के कर्मचारियों की साल 2024 में टाइपिंग परीक्षा कराई गई, जिसमें तीन कर्मचारी पास नहीं हुए. प्रशासन ने उनको किसी प्रकार की सजा नहीं बल्कि, सुधार का समय दिया. इस दौरान उनका इंक्रीमेंट रोक दिया गया, ताकि वो इस बात का पछतावा करें और सुधार कर लें. लेकिन दो साल बीत जाने के बाद भी जब तीनों कर्मचारियों में कोई सुधार नहीं हुआ, तो तीनों कर्मचारियों पर कार्रवाई की गई. प्रशासन ने उन्हें जूनियर क्लर्क से चपरासी बना दिया.
1 मिनट में नहीं टाइप कर पाए 25 शब्द
प्रशासन ने उन्हें कई मौके दिए लेकिन उन पर कोई सुधार नहीं हुआ. जानकारी के अनुसार, पिछले साल 2025 में भी टाइपिंग की परीक्षा कराई गई, लेकिन रिजल्ट सेम ही रहा. तीनों कर्मचारी 1 मिनट में 25 शब्द टाइप नहीं कर पाए. प्रशासन ने इस बार मामले को गंभीरता से लिया और फिर कनिष्ठ लिपिक से हटाकर चतुर्थ श्रेणी का कर्मचारी बना दिया. जब से यह आदेश जारी हुआ है. चारों ओर इसकी चर्चा हो रही है.
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नियमों के तहत हुई कार्रवाई
कानपुर प्रशासन ने बताया कि अगर कोई कर्मचारी अपने पद की नैतिक जिम्मेदारी को नहीं निभा पाता, तो कामकाज भी प्रभावित होता है. जिसकी वजह से यह कार्रवाई की गई है. कार्रवाई नियमों के तहत ही की गई है. हालांकि, कार्रवाई के बाद कानपुर कलेक्ट्रेट में काफी हलचल मच गई है. कर्मचारी भी अब चौकन्ने हो गए हैं, कि अगर सही काम और समय पर नहीं किया कार्रवाई उन पर भी हो सकती है. फिलहाल, इस मामले की खूब चर्चा हो रही है.