Crowd levels serious allegations: पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों सियासी घमासान देखने को मिल रहा है. बंगाल की सत्ता अब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पास है. पूर्व में बंगाल की सत्ता संभालने वाली पार्टी टीएमसी अब विपक्ष की भूमिका में है. जब से बंगाल में टीएमसी विपक्ष की भूमिका में आई है, तब से लगातार उसको भारी विरोध का सामना करना पड़ रहा है. पहले टीएमसी के महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी, फिर सांसद कल्याण बनर्जी और अब एक सांसद बापी हलदर के दफ्तर पर लोगों ने धावा बोल दिया है.
बंगाल में 15 सालों तक राज करने के बाद विपक्ष की भूमिका निभा रही टीएमसी के नेताओं को क्षेत्र में भारी विरोध का सामना करना पड़ रहा. दक्षिण 24 परगना जिले के मथुरापुर में रविवार को भीड़ ने अचानक एक सांसद के दफ्तर पर धावा बोल दिया, जिसके बाद इलाके में भारी तनाव की स्थिति बन गई. भीड़ देखते ही देखते इतनी उग्र हो गई कि दफ्तर के शीशे, साइनबोर्ड और फर्नीचर्स को पूरी तरह से चकनाचूर कर दिया.
क्यों हुआ हमला?
दरअसल, ग्रामीणों ने आरोप लगाया था कि गरीबों और बाढ़ पीड़ितों के लिए आई राहत सामग्री को सांसद ने अपने दफ्तर में छिपाकर रखा है. जिसके बाद भीड़ उग्र हो गई. भीड़ ने यह भी दावा किया कि टीएमसी सांसद का दफ्तर एक तालाब पर अवैध रूप से कब्जा करके बनाया गया है. हालांकि टीएमसी सांसद ने इन सभी आरोपों को नकार दिया है और इस घटना के पीछे भाजपा को जिम्मेदार ठहराया है.
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क्या बोले सांसद?
टीएमसी सांसद ने कहा कि ऐसा कुछ भी नहीं हो, जो आरोप लगाए जा रहे हैं. पार्टी कार्यालय में जो भी राहत सामग्री रखी गई है. वह सब हमने अपने निजी पैसे से खरीदा, ताकि बाढ़ पीढ़ितों की मदद की जा सके. बता दें, इससे पहले भी टीएमसी के दो सांसदों पर हमला हो चुका है. जिसमें अभिषेक बनर्जी को काफी चोट भी आई है. टीएमसी की मुखिया और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इन घटनाओं को लोकतंत्र की हत्या करार दिया है.
