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TMC के बागी सांसदों NCPI में ही क्‍यों हुए शामिल? क्या है इस पार्टी का इत‍िहास

बागी सांसदों की लोकसभा अध्‍यक्ष से मुलाकात

बागी सांसदों की लोकसभा अध्‍यक्ष से मुलाकात

NCPI party history: ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी में विधायकों के बाद अब सांसदों की टूट हो गई है. TMC के 28 में से 20 लोकसभा सांसदों ने रविवार को त्रिपुरा की नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी (NCPI) में विलय का ऐलान कर द‍िया है. इस बात का ऐलान सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने रविवार को ही कर द‍िया था. इस दौरान उन्‍होंने कहा कि वह PM मोदी के नेतृत्व में NDA के साथ काम करेंगे. ऐसे में सवाल उठता है कि आख‍िर जिस पार्टी में यह बागी गए हैं उसका इतिहास-भूगोल क्या है? इसके बारे में हम आपको बताते हैं.  

NCPI यानी कि नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया इसका पूरा नाम है.  इस पार्टी का गठन 20 जनवरी, 2023 को एक को हुआ था. गठन भी इस त्रिपुरा विधानसभा चुनाव से ठीक पहले ही हुआ था. मतलब यह कि इस पार्टी की उम्र अभी 5 साल की भी नहीं हुई है.  

कैसा है पार्टी का इत‍िहास?

नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) त्रिपुरा की रजिस्टर्ड लेकिन गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक पार्टी है.  मूलरूप से यह पार्टी पश्चिम बंगाल में रजिस्टर हुई थी. लेकिन यह त्रिपुरा में ही एक्ट‍िव रही है. हालांकि पार्टी गठन से लेकर अब तक इसकी कोई खास उपलब्धि नहीं रही है. चुनाव आयोग के रिकॉर्ड के अनुसार, पार्टी को कुल मिलाकर सिर्फ 1.13 लाख रुपये का चंदा मिला है. पार्टी के दस्तावेजों में शेवली कुंडू को कोषाध्यक्ष बताया गया है.  

पार्टी का नारा था, “अपने अधिकार बचाने के लिए दलबदलुओं को नकारें, राजनीतिक हस्तियों नहीं बल्कि सामाजिक कार्यकर्ताओं का समर्थन करें. एनसीपीआई का पंजीकृत पता बंगाल के हावड़ा जिले के बानीपुर क्षेत्र में स्थित है. पार्टी के अध्यक्ष शेली कुंडू के पति उत्तिया कुंडू हैं.

कब लड़ा था पहला चुनाव?  

NCPI यानी कि नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया ने पहला चुनाव त्रिपुरा  में लड़ा था. त्रिपुरा में एनसीपीआई का कामकाज शांतनु डे संभाल रहे हैं. त्रिपुरा की सात विधानसभा सीटों पर एनसीपीआई ने अपने उम्मीदवार खड़े किए थे, लेकिन चार सीटों पर उसके उम्मीदवारों के नामांकन पत्र खारिज कर दिए गए थे. ऐसे में केवल पार्टी उस समय 2 ही सीटों पर चुनाव लड़ पाई थी. इन पर भी पार्टी को जीत नहीं मिली थी.

जीरो से 20 सांसद तक का सफर

अब तक न तो पार्टी का कोई सांसद था और न ही कोई विधायक था. टीएमसी के बाग‍ियों का समर्थन मिलने के बाद सांसदों की संख्या 20 हो गई है.   टीएमसी के दो-तिहाई सांसदों वाले समूह ने एनसीपीआई के साथ अपना नाता जोड़ लिया है.  बागी सांसदों के टीएमसी से अलग होने की घोषणा के बाद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर अलग बैठने की व्यवस्था की मांग की है. 

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