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TMC में बढ़ी अंदरूनी कलह! ममता बनर्जी ने 2 विधायकों को पार्टी से न‍िकाला बाहर

ममता बनर्जी

ममता बनर्जी

WEST BENGAL POLITICS: पश्चिम बंगाल की सियासत में सोमवार को बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिला, जब ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस ने अपने दो विधायकों, संदीपन साहा और रितब्रता बनर्जी  को तत्काल प्रभाव से निष्कासित कर दिया. पार्टी का आरोप है कि दोनों नेता लगातार ऐसे कदम उठा रहे थे, जिससे संगठन की छवि और हितों को नुकसान पहुंच रहा था.

बताया जा रहा है कि हाल के दिनों में पार्टी के भीतर कई मुद्दों को लेकर असहमति बढ़ी थी.दोनों विधायकों पर पार्टी लाइन से हटकर बयान देने और संगठनात्मक बैठकों से दूरी बनाने के आरोप लगे थे.इसी के बाद शीर्ष नेतृत्व ने सख्त फैसला लेते हुए उन्हें प्राथमिक सदस्यता से बाहर कर दिया.

कार्रवाई पर उठे सवाल

यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब विधानसभा से जुड़े कथित हस्ताक्षर विवाद और पार्टी की अंदरूनी रणनीति को लेकर बंगाल की राजनीति में चर्चा तेज है.संदीपन साहा ने भी कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं पर सवाल उठाए थे, जिसके बाद विवाद और बढ़ गया.

ऐसा पहली बार नहीं जब किसी नेता ने पार्टी की व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हों, पहले भी कई नेता सवाल उठा चुके हैं. हालांकि सवाल उठाने के बाद या तो उन्‍होंने खुद पार्टी छोड़ दी या उन्हें पार्टी से बाहर कर द‍िया गया. सरकार बदलने के बाद से अब तक सैकड़ों नेता ममता का साथ छोड़ चुके हैं.

कल हुई थी बैठक आयोज‍ित 

सोमवार को ममता बनर्जी ने कालीघाट स्थित अपने आवास पर सभी विधायकों की बैठक बुलाई थी, जिसमें ज्यादातर विधायक शामिल नहीं हुए. बताया जा रहा है कि करीब 60 व‍िधायक शामिल नहीं हुए थे. जिसके बाद बैठक को कैंसिल करना पड़ा था.इस मामले ने तब तूल पकड़ लिया जब TMC विधायक संदीपन साहा ने ममता बनर्जी द्वारा बुलाई गई बैठक में शामिल न होने की वजह सार्वजनिक रूप से बताई.

साहा ने कहा कि विधानसभा में पार्टी नेता, उपनेता और मुख्य सचेतक (चीफ व्हिप) की नियुक्ति को लेकर पहले ही एक बैठक आयोजित की जा चुकी थी. हालांकि बाद में उस प्रोसेस को फॉलो ही नहीं किया गया है. य‍ही वजह है कि वह बैठक में शामिल नहीं हुए.

क्‍या कहते हैं राजनीतिक जानकार

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि चुनावी माहौल और हालिया घटनाओं के बाद TMC नेतृत्व अब संगठन में अनुशासन बनाए रखने के लिए कड़ा संदेश देना चाहता है.पार्टी की इस कार्रवाई को बाकी नेताओं के लिए भी चेतावनी के तौर पर देखा जा रहा है.

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