मुंबई। गणेशोत्सव से पहले मुंबई के सार्वजनिक गणपति मंडलों को राहत देते हुए बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाया. पीओपी से बनी गणेश मूर्तियों का विसर्जन पिछले साल की तरह इस साल भी प्राकृतिक पानी (समुद्र) में किया जाएगा. हाई कोर्ट ने गुरुवार को इस मामले को स्पष्ट किया. एक जनहित याचिका पर लंबी बहस सुनने के बाद कोर्ट ने पिछले शुक्रवार को फैसला सुरक्षित रख लिया था. हालांकि फैसला सुरक्षित रखते समय दिए गए अंतरिम आदेश को लेकर कन्फ्यूजन रहा और राज्य सरकार ने बुधवार को कोर्ट से स्पष्टीकरण मांगा था. कोर्ट ने इस पर संज्ञान लिया और गुरुवार को सुनवाई टाल दी.
पिछले वर्ष की व्यवस्था लागू रहेगी
न्यायमूर्ति अजय गडकरी और कमल खाता की बेंच के सामने सुनवाई की गई. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि याचिका पर फैसला आने तक 9 जून 2025 का नहीं बल्कि 24 जुलाई 2025 को दिया गया फैसला लागू होगा. 24 जुलाई, 2025 के आदेश के अनुसार, छह फीट तक की गणेश मूर्तियों को कृत्रिम तालाबों में विसर्जित करना जरूरी कर दिया गया था, जबकि छह फीट से ज्यादा बड़ी गणेश मूर्तियों को प्राकृतिक पानी में विसर्जित करने की इजाजत दी गई थी.
कोर्ट ने साफ किया कि यह अंतरिम आदेश फैसला आने तक लागू रहेगा. मुंबई हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश को लेकर बड़ी गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन पर असमंजस की स्थिति बनी हुई है. 6 फीट से अधिक ऊंची पीओपी गणेश प्रतिमाओं को प्राकृतिक जलस्रोतों में विसर्जन की अनुमति से जुड़ी व्यवस्था को लेकर प्रशासनिक स्तर पर तैयारी की जा रही है, जबकि छोटी मूर्तियों के लिए कृत्रिम तालाबों में विसर्जन की व्यवस्था पर जोर रहेगा. मुंबई हाईकोर्ट ने 24 जुलाई 2025 को जारी किए गए अंतरिम आदेश को इस वर्ष भी कायम रखा है. मामले में अंतिम फैसला आने तक यही व्यवस्था लागू रहने की बात कही गई है.
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