RSS Ban Removed: साल 1966, तारीख थी 30 नवंबर…RSS के कार्यक्रमों में सरकारी कर्मचारियों के शामिल होने पर प्रतिबंध लगा दिया गया था. अब मोदी सरकार ने ‘इंदिरा काल’ में लिए गए इस फैसले को हटा लिया है. मोदी सरकार ने कहा कि इस निर्णय की समीक्षा की गई, उसके बाद यह फैसला लिया गया है. केंद्र सरकार ने 1966 के अपने आदेश को वापस लेते हुए अब सिविल सेवकों को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के कार्यक्रमों में शामिल होने की अनुमति दे दी है.
क्या था वो आदेश?
सरकार की ओर से कहा गया है कि 30 नवंबर, 1966 को जारी आदेश को वापस ले लिया गया, जिसमें सिविल सेवकों को राजनीतिक गतिविधियों को अंजाम देने वाले संगठनों में शामिल होने से रोक दिया गया था. 1966 के आदेश में कहा गया है: ” केंद्रीय सेवा (आचरण) नियम 1964 के प्रावधानों के तहत कोई भी सरकारी कर्मचारी किसी भी राजनीतिक दल या किसी भी संगठन का सदस्य नहीं होगा या उससे कोई संबंध नहीं रखेगा जो राजनीति में भाग लेता है या किसी भी तरह से किसी राजनीतिक आंदोलन या गतिविधि में भाग लेता है.
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फैसले का विरोध कर रही है कांग्रेस
मोदी सरकार के इस फैसले के बाद कांग्रेस इसका जमकर विरोध कर रही है. रमेश ने कहा, “सरदार पटेल ने गांधी जी की हत्या के बाद फरवरी 1948 में आरएसएस पर प्रतिबंध लगा दिया था. इसके बाद, अच्छे व्यवहार के आश्वासन पर प्रतिबंध हटा लिया गया था. इसके बाद भी आरएसएस ने नागपुर में कभी तिरंगा नहीं फहराया.” कांग्रेस नेता ने बताया कि 1966 में फिर से प्रतिबंध लगाया गया. आदेश में कहा गया, “राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और जमात-ए-इस्लामी की सदस्यता और सरकारी कर्मचारियों द्वारा उनकी गतिविधियों में भागीदारी के संबंध में सरकार की नीति के बारे में कुछ संदेह उठाए गए हैं, इसलिए यह स्पष्ट किया जाता है कि सरकार ने हमेशा इन दोनों संगठनों की गतिविधियों को इस तरह की प्रकृति का माना है कि सरकारी कर्मचारियों के उनमें भागीदारी केंद्रीय सिविल सेवा आचरण नियमों के तहत आती है.”
रमेश ने प्रतिबंध हटाए जाने की कड़ी आलोचना की और इस कदम के समय पर सवाल उठाते हुए कहा, “9 जुलाई 2024 को 58 साल पुराना प्रतिबंध हटा लिया गया, जो वाजपेयी के प्रधानमंत्री कार्यकाल के दौरान भी लागू था.”रमेश ने आगे कहा, “मुझे लगता है कि नौकरशाह अब पैंटी पहनकर भी आ सकते हैं.” उन्होंने आरएसएस की खाकी शॉर्ट्स की वर्दी की ओर इशारा किया, जिसे 2016 में भूरे रंग की पतलून से बदल दिया गया था.
What had been happening by breaking the law has now beem regularised as the tensions between the G2 and the RSS ratchet up. https://t.co/gTXSHw0Hky
— Jairam Ramesh (@Jairam_Ramesh) July 21, 2024
लोकतांत्रिक व्यवस्था मजबूत होगी: RSS
आरएसएस ने इस कदम की सराहना करते हुए कहा कि इससे देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था मजबूत होगी. इसने पिछली सरकारों पर अतीत में प्रतिबंध लगाकर अपने राजनीतिक हितों को आगे बढ़ाने का भी आरोप लगाया. संगठन के नेता सुनील आंबेकर ने कहा, “राष्ट्रीय सुरक्षा, एकता-अखंडता और प्राकृतिक आपदाओं के समय आरएसएस के योगदान के कारण, देश में विभिन्न प्रकार के नेतृत्व ने समय-समय पर आरएसएस की भूमिका की प्रशंसा की है.”