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दिल्ली की इस दरगाह में मनाई जाती है बसंत पंचमी, 700 साल पुरानी परंपरा, खुसरो के गीत से गूंज उठता है माहौल

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हजरत निजामुद्दीन की दरगाह में मनाई जाती है 'बसंत पंचमी'

Basant Panchmi: ‘बसंत पंचमी’ के आते ही दिल्ली की एक दरगाह में अमीर खुसरो का ‘सकल बन फूल रही सरसों, बन बन फूल रही सरसों…’ गीत गूंजने लगता है. दरगाह का एक-एक कोना पीली सरसों से महक जाता है. पीले गेंदे के फूल चारों ओर दिखाई देते हैं. पीली चादर ही चढ़ाई जाती है. कव्वाली गाते लोगों का जोश माहौल को सुरीला बना देता है. इस त्योहार को एक अलग ही रंग में रंग देता है.

दिल्ली की किस दरगाह में ‘बसंत पंचमी’ मनाई जाती है?

हिंदू मायथोलॉजी के मुताबिक ‘बसंत पंचमी’ के दिन देवी सरस्वती की पूजा की जाती है. लोग पीले परिधान पहनकर भक्ति भाव से पूजा करते हैं. दिल्ली स्थित सूफी संत हरजत निजामुद्दीन की दरगाह में अनोखा रंग देखने मिलता है. यहां ‘बसंत पंचमी’ का त्योहार हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है. ये मजहब की दीवारों को तोड़कर गंगा-जमुनी तहजीब का अनोखा संदेश देती है.

क्या है 700 साल पुरानी परंपरा?

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हजरत निजामुद्दीन चिश्ती सिलसिला के प्रमुख संत

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