MP News: मध्य प्रदेश के राजगढ़ से एक ऐसा मामला सामने आया जिसने सभी को हैरान कर दिया. दरअसल यहां पर चल रहे एक सरकारी छात्रावास में मासूम बच्चों को फल, दूध तो छोड़िए रोटी तक खाने को नहीं मिल रही है. इस छात्रावास में बच्चों को भूखे पेट सोना पड़ता है और अगर वह खाना मांगते है तो साफ मना कर दिया जाता है. अब जब छात्रावास संचालकों की मनमानी सबके सामने आ गई है तो लोगों के बीच इस मामले पर गुस्सा नजर आ रहा है.
छात्रावास में नहीं मिल रहा भरपेट खाना
मामला मध्य प्रदेश के राजगढ़ के एक शासकीय बालक प्री-मैट्रिक विमुक्त जाति छात्रावास का है. यहां पर निरीक्षण करने पहुंचे तहसीलदार विनीत गोयल को देखकर भूखे पेट बच्चे रो पड़े और उनसे अपना दर्द सुनाया. बच्चों ने कहा कि उन्हें हर रोज खाने में केवल दो रोटी दी जाती हैं. आज भी वह भूखे हैं, ये सुनकर तहसीलदार ने तुरंत होटल से खाना मंगाकर बच्चों को खिलाया.
तहसीलदार के सामने रो पड़े मासूम
गौरतलब हैं पिछले दिनों शिकायत मिलने पर 20 फरवरी को अधिकारी निरीक्षण करने पहुंचे थे, जरूरी दिशा निर्देश भी दिए, लेकिन बच्चों से बात नहीं की. इसके बाद रविवार को एसडीएम अंकिता जैन ने तहसीलदार को छात्रावास भेजकर वास्तविकता पता करने का निर्देश दिया. इसी वजह से जब तहसीलदार हॉस्टल पहुंचे और छठवीं के छात्र से बात की, छात्र ने उन्हें बताया कि सुबह खाने में उन्हें केवल दो रोटियां मिली हैं. वहीं एक अन्य छात्र ने कहा कि कई बार तो भूखे पेट ही सोना पड़ता है.
जली रोटी खाते हैं बच्चे
इतना ही नहीं छात्र ने बताया कि अगर शिकायत की जाती है तो फिर उन्हे डराया धमकाया जाता है. वापस घर भेजने की धमकी दी जाती है. बच्चों की मानें तो नाश्ते में रोज उन्हें पोहा, दोपहर में दाल-रोटी और रात में आलू-टमाटर या आलू-मटर की सब्जी मिलती है. विनीत गोयल ने बताया कि बच्चों के अनुसार उन्हें सही खाना नहीं दिया जा रहा, जली हुई रोटी दी जाती हैं. पंचनामा बनाया है, जिसे कलेक्टर को भेजा जाएगा.
