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Dhar Bhojshala: भोजशाला सर्वे में ASI को मिले 11वीं -13वीं शताब्दी के लेख, पिलरों पर दर्ज है परमार राजाओं का इतिहास

Dhar Bhojshala

धार भोजशाला

Dhar Bhojshala Discovery: मध्‍य प्रदेश के बहुचर्चित धार भोजशाला मामले में ASI ने पुरातात्विक सर्वेक्षण रिपोर्ट हाई कोर्ट में पेश कर दी है. रिपोर्ट में परिसर के ऐतिहासिक स्‍वरूप, स्‍‍थापत्य और शिलालेखों से जुड़े कई बड़े खुलासे सामने आए हैं. इसमे विशेष रूप से 11वीं से 13वीं शताब्दी के दौरान राजा भोज और राजा अर्जुन वर्मन द्वारा करवाए गए निर्माण और सांस्‍कृतिक कार्यों के सबूत मिले हैं.

परिसर में मिले 106 स्‍तंभ, 32 शिलालेख

एएसआई रिपोर्ट के अनुसार, पूरे परिसर में कुल 106 स्‍तंभ मिले हैं, इन सभी पर अलग-अलग प्रकार की नक्काशी और डिजाइन देखने को मिली है. इसके अलावा 32 शिलालेख भी मिले हैं. इन सभी शिलालेखों पर राजा भोज के समय लिखित और अर्जुन वर्मन के राजगुरु मदन द्वारा ‘रचित पारिजलमंजरी नाटिका’ और ‘विजयश्री नाटक’ के पहले दो अंकों का उल्‍लेख भी मिलता है. पूरे परिसर में अलग-अलग पत्थरों पर ऐसी कई रचनाएं और नाट्यांश लिखे मिले है.

शिलालेखों में मुस्लिम शासकों के स्‍थापित होने का जिक्र

भोजशाला परिसर में मिले कुछ शिलालेखों में 14वीं शताब्दी के समय मालवा प्रांत में मुसलमानों के आने और मुस्लिम शासकों के स्‍थापित होने का भी जिक्र है. आपको बता दें कि 1389 ईस्‍वी में दिलावर खान, जिसका मूल नाम हुसैन था, उसे दिल्‍ली से मालवा प्रांत का राज्यपाल नियुक्त किया था. इसके बाद दिलावर खान ने धार में स्‍वतंत्रता की घोषणा की थी. इसे अपनी राजधानी बनाया गया और 1401 ईस्‍वी में शाही उपाधि धारण करने के बाद स्‍वतंत्र रूप से अपना राज्य चलाया. रिपोर्ट में दर्ज इन सभी तथ्‍यों को लेकर ऐतिहासिक और कानूनी परिप्रेक्ष्‍य में आगे बहस होने की पूरी संभावना जताई जा रही है.

पूरे परिसर में 56 अरबी और फारसी शिलालेख

इस सर्वे में नागपुर के शिलालेख विज्ञान विभाग के एक पुरातत्वविद् ने भोजशाला परिसर की कमाल मौला मस्जिद और कमाल मौला मकबरे में मिले 56 अरबी शिलालेखों का पूरी तरह से अध्‍ययन किया. इसमें 43 स्‍याही से लिखे शिलालेख हैं, जिनमें यहां आने वाले लोगों का विवरण दिया गया है.

इसमें कुछ शिलालेखों पर इस्‍लामी मत, प्रार्थना और ईश्वर के गुणों जैसे धार्मिक ग्रंथ के कुछ अंश भी है, जबकि कुछ में फारसी कविता के दोहे और व्‍यक्तियों के नाम हैं. वही इसमें लिखी अरबी और फारसी शिलालेख मालवा के मुस्लिम इतिहास को समझने में सहायक होते हैं, जो मुसलमानों के आने और धार को राजधानी बनाने साथ ही मालवा में शासन की स्‍थापना के बारे में पूरी तरह से बताते हैं.

शिलालेखों पर लिखीं है कुरान की आयतें

एएसआई की रिपोर्ट के अनुसार, कमाल मौला के मकबरे के परिसर के अंदर कुरान की आयतें लिखे शिलालेख मिले हैं, जो ईश्वर के गुणों और एकेश्वरवाद पर आधारित हैं. ये शिलालेख दो प्रकार के होते हैं.

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