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Khandwa: जानें बकरीद पर क्यों दी जाती है कुर्बानी, सड़कों पर नामाज़ और गाय को लेकर क्या बोले शहर काजी

Bakrid 2026

काजी सैय्यद निसार अली

Khandwa/शेख शकील: मध्य प्रदेश सहित पूरे देश भर में गुरुवार को मुस्लिम समाज के द्वारा बकरीद का त्यौहार मनाया जाएगा. बड़े पैमाने पर मनाए जाने वाले इस पर्व में मुस्लिम समाज जन के द्वारा जहां सुबह के समय ईदगाह में नमाज अदा की जाती है, तो वहीं इसके ठीक बाद अगले तीन दिनों तक बहुत बड़े स्तर पर जानवरों की कुर्बानी भी दी जाती है. इसी के चलते इस त्यौहार को लेकर जिला प्रशासन के साथ ही स्थानीय पुलिस बल भी अलर्ट मोड पर रहता है, जिससे कहीं कोई अप्रिय स्थिति नहीं बने.

अल्लाह की ली गयी परीक्षा की याद में है कुर्बानी

वहीं बकरीद के इस त्यौहार को लेकर खंडवा शहर काजी सैय्यद निसार अली ने बताया कि, कुर्बानी का यह त्यौहार अल्लाह की राह में त्याग और प्रेम का त्योहार माना जाता है. इसलिए इस त्यौहार में चौपाये जानवरों की कुर्बानी अल्लाह की राह में दी जाती है. यह कुर्बानी अल्लाह के एक पैगम्बर हज़रत इब्राहिम अलैहिस्सलाम के द्वारा अपने बेटे हज़रत इस्माईल अलैहिस्सलाम को कुर्बान करने की याद के रुप में दी जाती है, क्योंकि अल्लाह उनकी परीक्षा लेना चाहता था. और इसको लेकर उन्हे ख्वाब में अपनी सबसे अजीज चीज को कुर्बान करने का हुक्म हुआ था.

गाय बने राष्ट्रीय पशु, बेचने वालों पर हो कार्रवाई

इस कुर्बानी में चूंकि बकरे, भेड़ या ऊंट, भैंस वगेरह को कुर्बान किया जाता है. लेकिन कई जगह गोवंश से जुड़े मामले भी सुनने को मिलते हैं. इसको लेकर शहर काजी ने माना कि, इस कुर्बानी में गोवंश या गाय का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए. यही नहीं उन्होंने तो यहां तक मांग कर डाली के जो लोग गाय को बेचने निकलते हैं, ऐसे लोगों पर ही सख्त कार्रवाई करना चाहिए जिससे आगे न कोई खरीद सके और ना ही कोई अप्रिय स्थिति बन. वे यही नहीं रुके, और उन्होंने आगे कहा कि गाय चूंकि एक बड़े तबके के लिए पूज्यनीय है, इसलिए सरकार को इसे राष्ट्रीय पशु घोषित कर देना चाहिए. जिसकी कई मुस्लिम संगठन लगातार मांग भी कर रहे हैं, और वे भी इसका समर्थन करते हैं.

सड़कों पर नमाज़, स्वच्छता की खास अपील

बता दें कि, अक्सर देखने में आता है कि ईद के समय सड़कों पर भी ईद की नमाज अदा की जाती है. जिसको लेकर कई बार पुलिस और मुस्लिम समाज जन के बीच बहस या टकराव की स्थिति देखने को मिलती है. जिसको लेकर शहर काजी ने कहा कि हिंदुस्तान में कई त्यौहार सड़कों पर मनाए जाते हैं, और उनसे मुस्लिम समाज को किसी तरह की कोई आपत्ति नहीं रहती. इसीलिए उनका यह मानना है कि किसी अन्य समाज को भी कुछ देर के लिए होने वाली ईद की नमाज से आपत्ति नहीं होगी. साथ ही उन्होंने त्यौहार को लेकर आपील भी जारी करते हुए कहा कि इस त्यौहार को अमन चैन और भाईचारे के साथ ही स्वच्छता जो की मुस्लिमों के ईमान का आधा हिस्सा होता है, उसके साथ ही मनाया जाए.

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