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भागीरथपुरा जल त्रासदी पर विधानसभा में तूफानी बहस, कैलाश विजयवर्गीय बोले–यह आत्मग्लानि की घटना

Bhagirathpura water crisis

Bhagirathpura water crisis

इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पेयजल से हुई मौतों के मामले ने विधानसभा में तीखी और भावनात्मक बहस का रूप ले लिया. स्थगन प्रस्ताव पर हुई चर्चा के दौरान सत्ता और विपक्ष आमने-सामने आ गए. मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने घटना को गंभीर और “आत्मग्लानि लाने वाली” बताया, वहीं नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सरकार की जवाबदेही तय करने की मांग करते हुए इस्तीफे तक की बात कही. चर्चा की शुरुआत कांग्रेस विधायक भंवर सिंह शेखावत सहित अन्य विधायकों ने की. अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने भी टिप्पणी की कि नगर निगम की ओर से शुद्ध पानी की समुचित व्यवस्था नहीं होने से लोगों को दूषित पानी मिला, जिसके कारण स्वास्थ्य संकट खड़ा हुआ.

पूरे इंदौर के लिए बड़ा कलंक-कैलाश विजयवर्गीय

कैलाश विजयवर्गीय ने जवाब देते हुए कहा कि यह घटना पूरे इंदौर के लिए “बड़ा कलंक” है. उन्होंने बताया कि सूचना मिलते ही वे तत्काल इंदौर पहुंचे, अधिकारियों को निर्देश दिए और निजी अस्पतालों में भर्ती मरीजों का इलाज मुफ्त कराया. उनके अनुसार एक रात में करीब ढाई सौ मरीजों को निजी अस्पतालों में भर्ती कराया गया. “मुंबई की धारावी जैसी स्थिति भागीरथपुरा में थी,” उन्होंने कहा. उन्होंने स्वीकार किया कि नगर निगम के पास संसाधन और बजट होने के बावजूद समय पर काम नहीं हुआ. दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए आयुक्त को हटाया गया, इंजीनियरों पर कार्रवाई की गई और कुछ कर्मचारियों को सेवा से पृथक किया गया.

जल आपूर्ति सुधार का काम चल रहा-कैलाश विजयवर्गीय

विजयवर्गीय ने बताया कि 2261 करोड़ रुपये की अमृत योजना के तहत पाइपलाइन और जल आपूर्ति सुधार का काम चल रहा है. 13 किलोमीटर मुख्य लाइन बिछाई जा चुकी है और 16 किलोमीटर अतिरिक्त लाइन डाली जा रही है. नर्मदा परियोजना के चौथे चरण में भी बजट प्रावधान किया गया है ताकि भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो. उन्होंने कहा, “हम गिरकर उठना जानते हैं. इंदौर नंबर वन था और रहेगा.”

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सरकार के जवाब को बताया अपर्याप्त

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सरकार के जवाब को अपर्याप्त बताते हुए कहा कि जब मंत्री स्वयं गलती स्वीकार कर रहे हैं तो नैतिक जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि 27 करोड़ रुपये ठेकेदार को एडवांस दिए गए, लेकिन समय पर काम नहीं हुआ. सिंघार ने आरोप लगाया कि नगर निगम और प्रशासनिक स्तर पर गंभीर लापरवाही हुई, परंतु बड़े अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई नहीं की गई.

यह सरकार की कृपा नहीं, संवैधानिक दायित्व है-सिंघार

सिंघार ने संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लेख करते हुए कहा कि स्वच्छ पानी देना हर नागरिक का मौलिक अधिकार है. “यह सरकार की कृपा नहीं, संवैधानिक दायित्व है,” उन्होंने कहा. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि स्वच्छ जल ‘राइट टू लाइफ’ का हिस्सा है. सिंघार ने भावुक स्वर में कहा कि एक 10 साल की मन्नत के बाद जन्मे बच्चे की मौत हुई, ऐसे में हम सामान्य राजनीतिक बहस कैसे कर सकते हैं?

उन्होंने 2019 में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि उस समय भी पानी के नमूनों में दूषितता पाई गई थी, लेकिन गंभीरता से कार्रवाई नहीं हुई. “60 में से 59 सैंपल दूषित पाए गए थे,” उन्होंने दावा किया. सिंघार ने पूछा कि संबंधित अधिकारियों पर आईपीसी की धाराओं के तहत आपराधिक प्रकरण क्यों दर्ज नहीं किया गया और सिर्फ तबादले या निलंबन तक कार्रवाई सीमित क्यों रही.

सदन में कुछ समय के लिए तीखी नोकझोंक

चर्चा के दौरान भाजपा विधायकों द्वारा पॉइंट ऑफ ऑर्डर उठाए जाने पर कांग्रेस विधायकों ने विरोध जताया. विपक्ष का कहना था कि जब मंत्री जवाब दे चुके हैं तो चर्चा रोकी नहीं जानी चाहिए. सदन में कुछ समय के लिए तीखी नोकझोंक हुई, जिसके बाद अध्यक्ष ने व्यवस्था बनाए रखने की अपील की. विजयवर्गीय ने कहा कि यह राजनीति का विषय नहीं बल्कि संवेदनशीलता का विषय है. उन्होंने स्वीकार किया कि वे व्यक्तिगत रूप से आहत हैं और इस दाग को मिटाने के लिए पूरी ताकत से काम करेंगे. “जख्मों की नुमाइश नहीं, उनका इलाज करना जरूरी है.’

जवाबदेही और प्रशासनिक दक्षता पर बड़ा सवाल

उन्होंने कहा ‘भागीरथपुरा की यह घटना न केवल इंदौर बल्कि पूरे प्रदेश में शहरी जल आपूर्ति व्यवस्था, जवाबदेही और प्रशासनिक दक्षता पर बड़ा सवाल खड़ा कर रही है. सरकार सुधार और कार्रवाई का दावा कर रही है, जबकि विपक्ष जवाबदेही और न्याय की मांग पर अडिग है. आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट और प्रशासनिक कदम इस बहस की दिशा तय करेंगे.’

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