Bhopal: नक्सलियों से जुड़े संगठनों पर नवंबर 2026 तक प्रतिबंध, कलेक्टरों को मिला NSA लगाने के अधिकार

Bhopal: मध्यप्रदेश में नक्सल गतिविधियों के खिलाफ सरकार सख्त रुख अपनाए हुए है. प्रदेश को नक्सल मुक्त घोषित किए जाने के बावजूद सरकार किसी भी तरह का जोखिम लेने के मूड में नहीं है.
फाइल फोटो

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Bhopal: मध्यप्रदेश में नक्सल गतिविधियों के खिलाफ सरकार सख्त रुख अपनाए हुए है. प्रदेश को नक्सल मुक्त घोषित किए जाने के बावजूद सरकार किसी भी तरह का जोखिम लेने के मूड में नहीं है. इसी कड़ी में नक्सलियों से जुड़े संगठनों पर लगाया गया प्रतिबंध अब बढ़ाकर नवंबर 2026 तक कर दिया गया है. गृह विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (माओवादी) और उससे जुड़े संगठन—क्रांतिकारी किसान कमेटी (केकेसी) तथा क्रांतिकारी जन समिति (केजेसी)—पर यह प्रतिबंध यथावत लागू रहेगा.

नक्सल मुक्त प्रदेश

सरकार ने यह कार्रवाई मध्यप्रदेश विशेष क्षेत्र सुरक्षा अधिनियम, 2000 के तहत की है. इससे पहले 25 जनवरी 2024 को जारी अधिसूचना में इन संगठनों को विधि विरुद्ध घोषित किया गया था. नई अधिसूचना के मुताबिक, यह प्रतिबंध 18 नवंबर 2025 से एक वर्ष की अवधि के लिए प्रभावी रहेगा. सरकार का मानना है कि भले ही प्रदेश में नक्सल नेटवर्क कमजोर हुआ हो, लेकिन उससे जुड़े संगठनों की गतिविधियों पर लगातार निगरानी और नियंत्रण बनाए रखना बेहद जरूरी है. उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश को 31 दिसंबर को नक्सल मुक्त प्रदेश घोषित किया जा चुका है, फिर भी सुरक्षा एजेंसियां सतर्क बनी हुई हैं.

कलेक्टरों को मिलें विशेष अधिकार

वहीं कानून-व्यवस्था और साम्प्रदायिक सौहार्द बनाए रखने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने कलेक्टरों को विशेष अधिकार भी प्रदान किए हैं. आदेश के अनुसार, 1 अप्रैल से 30 जून 2026 तक कलेक्टर अपने-अपने जिलों में राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत कार्रवाई कर सकेंगे. गृह विभाग ने यह निर्णय उन रिपोर्टों के आधार पर लिया है, जिनमें कुछ तत्वों द्वारा साम्प्रदायिक माहौल बिगाड़ने और सार्वजनिक व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव डालने की आशंका जताई गई है.

सुरक्षा और कानून व्यवस्था के मामले में ढील नहीं

सरकार का कहना है कि इन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए एहतियातन यह कदम उठाया गया है, ताकि किसी भी प्रकार की असामाजिक या विध्वंसक गतिविधियों पर समय रहते नियंत्रण किया जा सके. NSA के तहत कलेक्टरों को यह अधिकार दिया गया है कि वे अपने जिले में आवश्यकतानुसार कार्रवाई कर सकें और शांति व्यवस्था बनाए रखें. कुल मिलाकर, राज्य सरकार का यह कदम स्पष्ट संकेत देता है कि सुरक्षा और कानून व्यवस्था के मामले में किसी भी प्रकार की ढील नहीं दी जाएगी और नक्सल तथा असामाजिक गतिविधियों के खिलाफ सख्ती लगातार जारी रहेगी.

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