Bhopal Metro Timing Change: भोपाल मेट्रो से जुड़ा हुआ एक बड़ा अपडेट सामने आया है. मध्य प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन ने मेट्रो सेवा की समय-सारणी में आंशिक बदलाव किया है. इस नए बदलाव तहत सप्ताह के अलग-अलग दिनों में मेट्रो संचालन के समय और ट्रेनों की आवृत्ति को व्यवस्थित किया गया है, ताकि यात्रियों को और बेहतर सुविधा मिल सके. अगर आप प्रतिदिन भोपाल मेट्रो से सफर करते हैं तो नया टाइमटेबल जरूर जान लें.
मध्य प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन ने भोपाल मेट्रो की समयसारणी में आंशिक परिवर्तन करते हुए नया टाइमटेबल जारी कर दिया है. ये नई समयसारणी 15 सितंबर यानी आज से लागू हो गई है. संशोधित समय-सारणी के अनुसार सोमवार से शनिवार तक मेट्रो सेवा का संचालन सुबह 11:30 बजे से शाम 7:30 बजे तक होगा. इस अवधि में पहले की तरह नियमित रूप से मेट्रो सेवाएं उपलब्ध रहेंगी, ताकि यात्रियों को आवागमन में किसी तरह की परेशानी न हो. इस दिनों हर 30 मिनट के अंतराल पर मेट्रो चलाई जाएंगी.
फेरों के बढ़ाने का निर्णय
हालांकि शाम के समय यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए फेरों के बढ़ाने का निर्णय लिया गया है. शाम 5:00 बजे से 7:30 बजे तक हर 15 मिनट में मेट्रो उपलब्ध रहेगी, जिससे दफ्तरों और अन्य कार्यों से लौटने वाले यात्रियों को अधिक सुविधा मिलेगी.
रविवार और सार्वजनिक अवकाश पर विशेष टाइमिंग
नई समय सारणी के मुताबिक, रविवार और सार्वजनिक अवकाशों के दिन मेट्रो की टाइमिंग में थोड़ा परिवर्तन हुआ है. इन दिनों मेट्रो सुबह साढ़े 11 बजे से रात साढ़े 8 बजे तक संचालित होगी. इससे छुट्टी के दिन यात्रा करने वाले लोगों को अतिरिक्त सुविधा मिलेगी. इतना ही नहीं छुट्टी वाली दिन मेट्रो के फेरों में बढ़ोतरी की गई है. रविवार और सार्वजनिक अवकाश के दिनों में सुबह 11:30 बजे से दोपहर 1:00 बजे तक मेट्रो हर 30 मिनट में चलेगी. इसके बाद दोपहर 1:00 बजे से रात 8:30 बजे तक प्रत्येक 15 मिनट के अंतराल पर मेट्रो सेवा उपलब्ध रहेगी.
मध्य प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन की तरफ यात्रियों की सुविधा को देखते हुए ये निर्णय लिया गया है. रोजाना मेट्रो से यात्रा करने वाले यात्रियों को अब नए शेड्यूल के अनुसार ही अपनी यात्रा का प्लान बनाना होगा. खासतौर पर यात्रियों को पहली और आखिरी मेट्रो के टाइमिंग को ध्यान में रखते हुए घर से निकलना और मेट्रो स्टेशन पहुंचना होगा.
ये भी पढ़ें: जब प्रदेश में डकैत ही नहीं, तो 45 साल पुराना कानून क्यों? एमपी हाई कोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब
