Vistaar NEWS

‘गैर-मुस्लिमों की दखलअंदाजी मंजूर नहीं’, वक्फ बोर्ड विवाद में शिया समुदाय की एंट्री से भड़के इमाम

Waqf Board Controversy India

वक्फ बोर्ड भोपाल

Shia group enters Waqf fight: मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड में सदस्यों की नियुक्ति के बाद विवाद गहरा गया है. विवाद के बीच करोंद स्थित आल-ए-मोहम्मद शिया जामा मस्जिद के इमाम-ए-जुमा मौलाना सैयद अज़हर हुसैन रिजवी ने कहा कि बोर्ड में किसी शिया आलिम या प्रतिनिधि को शामिल नहीं दिया जाना भी बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि वक्फ की जमीनें और संपत्तियां मुसलमानों की अमानत हैं. जिसमें गैर-मुस्लिमों को शामिल करना भी उचित नहीं है.

उन्होंने यह भी कहा, बक्फ की संपत्तियों का उद्देश्य हमेशा मुस्लिम समाज की भलाई रहा है, इसलिए इनके संचालन और निर्णय प्रक्रिया में भी मुस्लिम समाज की ही भागीदारी होनी चाहिए. यह संपत्ति नवाबों, राजाओं और संपन्न लोगों ने दान दी थी, ताकि गरीब तबके के मुसलमानों की शिक्षा, आवास और सामाजिक कल्याण किया जा सके.

प्रबंधन की जिम्मेदारी सिर्फ मुस्लिम के पासः मौलाना

शिया समुदाय की नियुक्ति को लेकर मौलाना सैयद अजहर हुसैन रिजवी ने कहा कि अगर कोई इस फैसले का समर्थन करता है, तो वह मुस्लिम समाज के प्रति उचित रवैया नहीं माना जा सकता है. अगर संपत्तियों का संबंध मुसलमानों से है, तो उसके प्रबंधन की जिम्मेदारी भी मुस्लिम प्रतिनिधियों के हाथ होनी चाहिए.

ये भी पढ़ेंः इंदौर से शुरू होगी जीतू पटवारी की 200KM की साइकिल यात्रा, भोपाल तक हर जिले से जुड़ेंगे 500 साइकिल यात्री

कम से कम 1 शिया समुदाय के प्रतिनिधि को मिले जगह

वहीं मौलाना रिजवी ने नए वक्फ बोर्ड में शिया समुदाय के किसी भी प्रतिनिधि को जगह नहीं मिलने पर भी आपत्ति जताई है. उनका कहना है कि कम से कम एक शिया आलिम या शिया समाज के प्रतिनिधि को बोर्ड में शामिल किया जाना चाहिए था, क्योंकि वक्फ का संबंध पूरे मुस्लिम समाज से है.

Exit mobile version