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Vidisha News: जापान से ग्यारसपुर पहुंचीं भिक्षुणी म्योसेन सतो, थुआरभिटा पहाड़ी पर बुद्ध प्रतिमा देख हुईं भावुक

Bhikshuni Myosen Sato

भिक्षुणी म्योसेन सतो विदिशा पहुंची

Vidisha News: विदिशा जिले की ग्यारसपुर ऐतिहासिक, धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत के लिए देश-दुनिया में पहचान रखने वाले ग्यारसपुर में शनिवार को जापान से भिक्षुणी म्योसेन सतो पहुंचीं. उन्होंने भोपाल से आए भंते शाक्य पुत्र सागर थेरो एवं बौद्ध संघ की टीम के साथ ग्यारसपुर की प्राचीन बौद्ध विरासत का भ्रमण किया भिक्षुणी म्योसेन सतो ने सबसे पहले ढेकीनाथ बौद्ध स्तूप के दर्शन किए.

प्राचीन अवशेष देखकर भावुक हुईं भिक्षुणी

इसके बाद थुआरभिटा की पहाड़ी पर स्थित तथाकथित भगवान बुद्ध की प्राचीन प्रतिमा के समक्ष माल्यार्पण कर मंत्रोच्चार, वंदना एवं पूजा-अर्चना की. उन्होंने समीप स्थित भगवान बुद्ध के खंडित सिर के भी दर्शन किए. इस दौरान पहाड़ी पर बिखरी प्राचीन संरचनाओं एवं पत्थरों को देखकर भिक्षुणी म्योसेन सतो भावुक हो गईं. उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में प्राचीन बौद्ध विरासत के अनेक अवशेष मौजूद हैं और ऐसा प्रतीत होता है कि पहाड़ी के भीतर भी महत्वपूर्ण ऐतिहासिक अवशेष दबे हो सकते हैं.

सरकार से की सर्वे और संरक्षण की मांग

उन्होंने कहा कि यहां का प्रत्येक पत्थर इस प्राचीन विरासत की कहानी बयां करता है. उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश पुरातत्व विभाग तथा केंद्र सरकार को इस क्षेत्र का वैज्ञानिक सर्वेक्षण एवं आवश्यक उत्खनन कराकर प्राचीन धरोहर को संरक्षित करना चाहिए. यह केवल किसी एक समुदाय की विरासत नहीं, बल्कि भारत की प्राचीन संस्कृति और इतिहास से जुड़ी अनमोल धरोहर है.

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ग्यारसपुर में पर्यटन की अपार संभावना

भिक्षुणी म्योसेन सतो ने भगवान बुद्ध की विशाल प्राचीन प्रतिमा की वर्तमान स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि देखरेख एवं संरक्षण के अभाव में ऐतिहासिक धरोहरें धीरे-धीरे नष्ट हो रही हैं. उन्होंने कहा कि यदि ऐसी विरासत जापान में होती तो उसके संरक्षण एवं विकास के लिए विशेष प्रयास किए जाते. उन्होंने सरकार से मांग की कि ग्यारसपुर की प्राचीन बौद्ध एवं अन्य ऐतिहासिक धरोहरों का संरक्षण कर उन्हें आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित किया जाए. साथ ही उन्होंने कहा कि ग्यारसपुर में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं और यह क्षेत्र ऐतिहासिक विरासत का खजाना है.

भ्रमण के दौरान भिक्षुणी म्योसेन सतो ने माला देवी मंदिर के भी दर्शन किए और वहां की ऐतिहासिक स्थापत्य विरासत के संरक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि ग्यारसपुर में विभिन्न धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ी अनेक प्राचीन इमारतें और पुरातात्विक अवशेष आज भी मौजूद हैं, जिन्हें व्यवस्थित रूप से संरक्षित और विकसित किया जाना चाहिए.

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