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सांप काटने या दिखने पर तुरंत मिलेगी मदद! MP वन विभाग ला रहा सांपों के रेस्क्यू वाला ‘शिवा ऐप’

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सांप सांकेतिक तस्‍वीर

MP News: मध्य प्रदेश में सर्पदंश की घटनाओं को कम करने और इंसानों के साथ सांपों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए वन विभाग डिजिटल तकनीक का सहारा लेने जा रहा है. विभाग प्रदेशभर के प्रशिक्षित स्नेक रेस्क्यूअर्स का डेटाबेस तैयार कर ‘शिवा एप’ विकसित कर रहा है. इसके जरिए लोग मोबाइल की जीपीएस लोकेशन के आधार पर आसपास मौजूद अधिकृत रेस्क्यूअर को मौके पर बुला सकेंगे.

जीपीएस से मिलेगी रेस्क्यूअर की जानकारी

एप में यूजर की लाइव लोकेशन के आधार पर आसपास मौजूद प्रमाणित स्नेक रेस्क्यूअर की जानकारी मिलेगी. इससे घर, दुकान या किसी अन्य जगह सांप दिखाई देने पर उसे सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू कराया जा सकेगा. इसका उद्देश्य लोगों को खुद सांप पकड़ने के जोखिम से बचाना और सांपों को भी सुरक्षित स्थान पर पहुंचाना है.

सर्पदंश पर मिलेगा प्राथमिक उपचार का मार्गदर्शन

‘शिवा एप’ में सांप के काटने की स्थिति में तत्काल किए जाने वाले प्राथमिक उपचार से जुड़ी जानकारी भी उपलब्ध होगी. इसके साथ ही पीड़ित को नजदीकी ऐसे अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्रों की लोकेशन भी बताई जाएगी, जहां एंटी-स्नेक वेनम उपलब्ध हो.

हर साल ट्रेनिंग के बाद मिलेगा लाइसेंस

वन विभाग स्नेक रेस्क्यूअर्स को अधिकृत करने के लिए विशेष प्रशिक्षण की व्यवस्था करेगा. प्रशिक्षण पूरा करने वाले रेस्क्यूअर्स को एक साल की वैधता वाला लाइसेंस दिया जाएगा. लाइसेंस को हर वर्ष रिन्यू कराना अनिवार्य होगा, ताकि प्रशिक्षित और अधिकृत लोग ही रेस्क्यू का काम कर सकें.

वन्यजीव सप्ताह में लॉन्च होगा एप

पीसीसीएफ (वाइल्डलाइफ) समीता राजौरा के अनुसार, ‘शिवा एप’ को 2 से 8 अक्टूबर तक आयोजित होने वाले वन्यजीव सप्ताह के दौरान लॉन्च करने की तैयारी है. विभाग को उम्मीद है कि इस डिजिटल व्यवस्था से सर्पदंश के मामलों में समय पर मदद पहुंचाने के साथ मानव और वन्यजीव दोनों की सुरक्षा बेहतर होगी.

सर्पदंश से हर साल हजारों मौतें

मध्य प्रदेश में सर्पदंश एक गंभीर समस्या है. उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, प्रदेश में हर साल करीब 2,500 से 2,800 लोगों की मौत सांप के काटने से हो जाती है. सर्पदंश से होने वाली मौतों के मामले में मध्य प्रदेश का आंकड़ा देश में सबसे अधिक बताया जाता है. ऐसे में ‘शिवा एप’ को समय पर सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में अहम पहल माना जा रहा है.

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