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एमपी में अब छोटे अपराधों पर नहीं होगी जेल, अपराधियों को भुगतनी होगी कम्युनिटी सर्विस, जानें क्या है ये नया निमय

MP community service rules

फाइल फोटो

मध्य प्रदेश में अब छोटे अपराधियों को सीधे जेल नहीं भेजा जाएगा. छोटे और पहली बार अपराध करने वाले कैदियों को अब हर मामले में जेल भेजने की बजाय उनके सामाजिक काम के जरिए सजा भुगतने का रास्ता साफ हो गया है. गृह विभाग द्वारा ‘मप्र कम्युनिटी सर्विस गाइडलाइंस-2026’ को अधिसूचित कर दिया गया है. इस गाइडलाइंस के मुताबिक, अदालत अपराध की प्रकृति और परिस्थितियों के अनुरूप निश्चित अवधि के लिए बिना वेतन सामुदायिक सेवा का आदेश दे सकेगी.

समाज के हित में काम करने की सजा

इसके तहत दोषी व्यक्ति को समाज के हित में काम करने की सजा दी जा सकती है. जैसे- हॉस्पिटल में सफाई करने की सजा, पौधारोपण करने की सजा, सामुदायिक जगहों की सफाई करने की सजा दी जाएगी. देशभर में एक जुलाई, 2024 से प्रभावी किए गए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) में इसका प्रविधान किया गया है
सामुदायिक सेवा का उद्देश्य दंड के साथ सामाजिक जिम्मेदारी का अहसास कराना है.

1 से 60 दिन तक की सजा का प्रावधान

गौरतलब है कि, मानहानि, नशे की हालत में सार्वजनिक स्थान पर दुर्व्यवहार, पहली बार चोरी जिसमें संपत्ति का मूल्य पांच हजार रुपये से कम हो, आत्महत्या का प्रयास और लोक सेवक द्वारा विधि के निर्देश की अवज्ञा जैसे अपराधों में सामुदायिक सेवा का प्रावधान किया गया है. इस दंड या सेवा की अवधि 1 से 60 दिन या फिर 40 से 240 घंटे तक हो सकती है. निगरानी के लिए जिला परिवीक्षा अधिकारी या सरकार द्वारा नामित अधिकारी की भूमिका रखी गई है.

योग्यता के अनुसार भी तय हो सकती है सजा

एक और जरूरी बात जो इस अधिसूचना में कही गई है कि सामुदायिक सेवा की सजा पाने वाला व्यक्ति यदि डाक्टर, इंजीनियर, लेखापाल या अधिवक्ता जैसे किसी पेशे का कुशल व्यक्ति है, तो अदालत उसके पेशेवर कौशल का इस्तेमाल ऐसा काम देने में कर सकती है जिससे जरूरतमंद या वंचित समुदाय को लाभ मिले.

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