Bhopal: मध्य प्रदेश (MP) में सरकारी शिक्षकों की गैर-शैक्षणिक कार्यों (Non-Academic Duties) में ड्यूटी लगाए जाने को लेकर एक बार फिर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है और शिक्षक संगठनों में भारी आक्रोश है. ताजा मामला राजधानी भोपाल का है, जहां जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) कार्यालय द्वारा 16 सरकारी शिक्षकों की ड्यूटी खटलापुरा घाट पर दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान भीड़ प्रबंधन और पहरा देने के लिए लगा दी गई है. इस आदेश के बाद से ही प्रदेश के शिक्षक संघों ने इसका तीखा विरोध शुरू कर दिया है.
19 अक्टूबर को जारी किया गया था आदेश
जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) कार्यालय द्वारा ये आदेश 19 अक्टूबर को जारी किया गया था. इस आदेश के अनुसार, इस आदेश के मुताबिक 20 अक्टूबर से 23 अक्टूबर तक रोज शाम 4 बजे से आधी रात यानी 12 बजे तक 4 शिक्षकों को नदी के विसर्जन घाट पर ड्यूटी देने को कहा गया है. घाट पर ड्यूटी देने वालों में प्रिंसिपल, वाइस-प्रिंसिपल और माध्यमिक व उच्च माध्यमिक शिक्षक शामिम हैं.
घाट पर होने वाली भीड़ को नियंत्रित करने का काम
इन सभी को घाट पर आने वाली भारी भीड़ को नियंत्रित करने का काम सौंपा गया है. इस पर शिक्षक संगठनों ने भारी विरोध दर्ज किया है. शिक्षक संगठनों का कहना है कि प्रशासन शिक्षकों को एक ‘आसानी से उपलब्ध होने वाले वर्कफोर्स’ के रूप में उपयोग कर रहा है. ये पूरी तरह से अनुचित है.
गुरुजी शिक्षक संघ के अध्यक्ष ने कहा…
इस पूरे मामले पर गुरुजी शिक्षक संघ, मध्य प्रदेश के राज्य अध्यक्ष राकेश पटेल ने इस पर कड़ा एतराज जताते हुए कहा, ‘प्रशासन ने पहले हमें आश्वासन दिया था कि शिक्षकों को केवल जनगणना या मतदाता सूची के संशोधन जैसे आवश्यक कार्यों में ही लगाया जाएगा. दुर्गा प्रतिमा विसर्जन, विशेषकर सार्वजनिक छुट्टियों के दौरान शिक्षकों की ड्यूटी लगाना पूरी तरह अनुचित है. इससे छात्रों की पढ़ाई प्रभावित होती है.’
जिला शिक्षा अधिकारी का क्या कहना है…
शिक्षक यूनियनों का कहना है कि सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन पुलिस, नगर निगम स्टाफ, स्वास्थ्य कर्मियों और स्वयंसेवकों का काम है, न कि बार-बार स्कूल के शिक्षकों पर निर्भर रहने का.वहीं जिला शिक्षा अधिकारी अभिनव आर्य का कहना है कि इसमें कुछ भी असामान्य नहीं हैं. शिक्षकों को पहले भी अलग-अलग तरह की प्रशासनिक जिम्मेदारियां सौंपी जाती रही हैं.
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