‘लव जिहाद की घटना के पीछे वसीम रिजवी’, फरहान और वायरल गर्ल पर भी भड़के डायरेक्टर सनोज मिश्रा

सनोज मिश्रा ने आगे कहा, 'मीडिया ने कभी भी जानने की कोशिश नहीं की. इसके पीछे डेढ़ दो साल पुरानी कहानी है. इसके पीछे शामिल है वसीम रिजवी. वसीम रिजवी ने फिल्म रुकवाने की पूरी कोशिश की. जब उसने देखा कि सनोज मिश्रा कहीं से टूटा नहीं तो उसने लव जिहाद की घटना को अंजाम दिलवाया है.'
Director Sanoj Mishra

डायरेक्टर सनोज मिश्रा

MP News: प्रयागराज महाकुंभ वायरल गर्ल के साथ लव जिहाद के मामले में खरगोन कोर्ट ने आरोपी फरहान की बेल खारिज कर दी है. वहीं बेल खारिज होने के बाद एक बार फिर डायरेक्टर सनोज मिश्रा ने पूरे मामले पर प्रतिक्रिया दी है. सनोज मिश्रा ने कहा कि बेल खारिज होने के बाद आरोपी फरहान और वायरल गर्ल दोनों बाहर आ गए हैं, और मीडिया में आकर अनर्गल बयानबाजी करने लगे हैं. मीडिया भी उनकी बातों पर ध्यान देता है, लेकिन मीडिया ये नहीं सोचता है कि पूरी घटना के पीछे आखिर कौन है?

‘बेल खारिज होने के बाद जिहादी और कचरा बीनने वाली बाहर आ गई’

सनोज मिश्रा ने पूरे मामले पर कहा, ‘आओ केरल-केरल खेलें. पिछले कई महीनों से वायरल गर्ल को लेकर लव जिहाद की घटना हुई थी. मैंने उसी दिन से आवाज उठानी शुरू की. मैंने आदिवासी परिवार का साथ दिया. मेरे ऊपर गंभीर आरोप लगाए गए. मैं जानता था कि सच्चाई का साथ देने पर ये सब होने वाला है. लेकिन मैंने फिर भी सच का साथ दिया. खरगोन की माननीय कोर्ट ने जिहादी की बेल खारिज कर दी. जिहादी की बेल खारिज होते ही वो बिलबिलाकर बिल से बाहर आ गया. वो और उसकी कचरा बीनने वाली भी दोनों मिलकर मीडिया में अनर्गल बयानबाजी कर रहे हैं.’

‘घटना के पीछे वसीम रिजवी का हाथ’

सनोज मिश्रा ने आगे कहा, ‘मीडिया ने कभी भी जानने की कोशिश नहीं की. इसके पीछे डेढ़ दो साल पुरानी कहानी है. इसके पीछे शामिल है वसीम रिजवी. वसीम रिजवी ने फिल्म रुकवाने की पूरी कोशिश की. जब उसने देखा कि सनोज मिश्रा कहीं से टूटा नहीं तो उसने लव जिहाद की घटना को अंजाम दिलवाया है.’

वहीं पूरे मामले पर सनोज मिश्रा ने जांच एजेंसियों और पुलिस पर भी सवाल उठाए हैं. सनोज मिश्रा ने कहा, ‘मुझे अफसोस है कि एमपी पुलिस और जांच एजेंसियों ने कोई कार्रवाई नहीं की. जिहादी वायरल गर्ल को केरल लेकर गया था. वहां के न्यायालय ने लगातार बेल इसलिए दे दिया गया. क्यों कि एमपी पुलिस ने कोई कोशिश नहीं की. लेकिन इसके बाद मानवाधिकार आयोग और जनजाति आयोग ने जब मामले में दखल दिया तो फिर मामले में कार्रवाई हुई और खरगोन न्यायालय ने आरोपी की बेल खारिज कर दी.’

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