इनपुट-अक्षय शर्मा
Sehore News:राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और जिला प्रशासन के कड़े निर्देशों को ठेंगा दिखाते हुए जिले के भाऊखेड़ी में शिक्षा माफिया का नया कारनामा सामने आया है. यहां संचालित ‘सरस्वती बाल विद्या मंदिर’ में शासकीय नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए स्कूल कैंपस के भीतर से ही खुलेआम किताबों का कोर्स बेचा जा रहा है. प्राचार्य और संचालक का केबिन किसी स्टेशनरी की दुकान में तब्दील हो चुका है, जहां मासूम बच्चों के पालकों से निजी प्रकाशकों की आड़ में मनमानी लूट मचाई जा रही है.
स्कूल में प्राइवेट पब्लिशर्स की किताबें थोपने का आरोप
यह बड़ा खुलासा हुआ है कि स्कूल प्रबंधन सस्ती और गुणवत्तापूर्ण एनसीईआरटी (NCERT) किताबों की जगह अज्ञात प्राइवेट पब्लिशर्स की भारी-भरकम किताबें थोप रहा है. बाजार की दुकानों से ये किताबें पूरी तरह गायब हैं, क्योंकि स्कूल संचालक खुद कमीशन के चक्कर में पूरा कोर्स बुलवाकर स्कूल से ही महंगे दामों पर बेच रहे हैं. रसीद मांगने पर कोई बिल नहीं दिया जाता और एमआरपी से भी अधिक वसूली की जा रही है.
नोटिस बोर्ड पूरी तरह से खाली
नियमों के मुताबिक शैक्षणिक सत्र शुरू होने से पहले कलेक्टर द्वारा गठित निगरानी समिति को यह सुनिश्चित करना होता है कि किताबें कम से कम तीन स्थानीय दुकानों पर उपलब्ध हों और दरों की सूची स्कूल के नोटिस बोर्ड पर चस्पा की जाए. लेकिन भाऊखेड़ी के इस स्कूल में नोटिस बोर्ड पूरी तरह खाली हैं.
कागजी नियमों के बल पर चल रहे इस खेल में शिक्षा विभाग के जिम्मेदार अधिकारी आंखें मूंदे बैठे हैं, जिससे उनकी भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं. अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस शिक्षा माफिया पर कोई ठोस दंडात्मक कार्रवाई करता है या कागजी जांच के नाम पर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा.
