मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने पत्र लिखकर अपील की है कि 16 अप्रैल से संसद में नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर चालू हो रहे 3 दिवसीय संयुक्त सत्र को खुलकर अपना समर्थन दें. दलगत राजनीति से ऊपर उठकर इस ऐतिहासिक बदलाव का समर्थन करें. यह अवसर किसी एक दल या व्यक्ति का नहीं, बल्कि: माताओं-बहनों और आने वाली पीढ़ियों के उज्ज्वल भविष्य का है.
संसद में नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर चर्चा
दरअसल 16 अप्रैल 2026 से संसद में नारी शक्ति वंदन अधिनियम के पूर्ण क्रियान्वयन पर ऐतिहासिक चर्चा होने जा रही है. यह केवल विधायी प्रक्रिया नहीं, बल्कि लोकतंत्र को अधिक समावेशी और सशक्त बनाने का अवसर है. देश की प्रगति के लिए महिलाओं (आधी आबादी) को निर्णय लेने और नेतृत्व में समान अवसर मिलना आवश्यक है.
महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में “विकसित भारत” के संकल्प में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है. मध्यप्रदेश , देश में महिला सशक्तिकरण के मॉडल राज्य के रूप में उभर रहा है. मध्यप्रदेश में लाड़ली बहना योजना और लाड़ली लक्ष्मी योजना से महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाया गया है.
अर्थव्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी
प्रदेश की एक करोड़ 25 लाख से अधिक बहनों को अब तक 55 हजार करोड रुपए की राशि उनके खातों में अंतरित की गई है. स्व-सहायता समूहों के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाई गई है. महिलाओं को सरकारी नौकरी में 35% का आरक्षण प्रदान किया जा रहा है. पुलिस और शिक्षक भर्ती में विशेष अवसर दिए गए हैं.
महिलाओं की भागीदारी के लिए 50% का आरक्षण
मध्यप्रदेश में पंचायत राज संस्थाओं में महिलाओं की प्रभावी भागीदारी के लिए 50% का आरक्षण सुनिश्चित किया गया है.नारी शक्ति वंदन अधिनियम से वर्ष 2029 के लोकसभा और विधानसभा चुनाव में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित होने से लोकतांत्रिक संस्थाओं में नई ऊर्जा आएगी , महिलाओं की प्रत्यक्ष भागीदारी बढ़ेगी और जन-विश्वास मजबूत होगा.
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सभी से आह्वान किया है “आइए मिलकर मध्यप्रदेश की नारी शक्ति का गौरव बढ़ाएं. लोकतंत्र को और मजबूत बनाएं”
