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दत‍िया के क‍िनारे पर कांग्रेस ने फ‍िर बनाया घर, नरोत्तम के आंसू या आशुतोष? किसकी वजह से बीजेपी हारी चुनाव

Ghanshyam Singh win

घनश्‍याम स‍िंह जीते चुनाव

Datia Bypoll Congress Victory Strategy: दतिया विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में कांग्रेस ने जीत दर्ज कर ली है. इस सीट पर कांग्रेस की यह लगातार दूसरी जीत है. यही वजह है कि अब चर्चा है कि नरोत्तम मिश्रा की चुनौती को स्वीकार करते हुए कांग्रेस ने दतिया के किनारे पर अपना घर बना लिया है. खास बात यह भी है कि इस बार पिछली बार के मुकाबले ज्यादा मजबूत घर बनाया गया है. कांग्रेस ने यहां से 6 हजार से ज्यादा वोटों से चुनाव जीता है, जिसके कई कारण हैं. सवाल यह उठ रहा है कि दति‍या सीट नरोत्तम मिश्रा के आंसुओं की वजह से कांग्रेस के पाले में गई?

प्रदेश के तमाम राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बीजेपी की हार की पटकथा नरोत्तम मिश्रा आंसूओं के बाद ही लिख गई थी. उसी समय तय हो गया था कि यहां कांग्रेस ही जीत दर्ज करेगी. हार की एक वजह यह भी है कि कांग्रेस के साथ-साथ इस बार बीजेपी में भी अंतर्कलह थी. जिसका परिणाम आज सभी के सामने है.

बीजेपी की हार के फैक्टर

भारतीय जनता पार्टी के दतिया में चुनाव हारने के कई कारण हैं. सबसे बड़ा कारण नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटने के बाद दतिया में हुआ बवाल माना जा रहा है. इसके अलावा भी कई कारण हैं, आइये जानते हैं.

1. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस बार दतिया से बाहर का बीजेपी ने प्रत्याशी द‍िया, यही वजह रही कि जनता से कनेक्शन ठीक से नहीं हो सका.  

2. आशुतोष तिवारी संघ से जुड़े हुए हैं. वह मूल रूप से संघ के नाम से ही जाने जाते हैं. पब्‍ल‍िक में उनकी जान पहचान बतौर नरोत्तम मिश्रा बहुत कम है. यह भी उनकी हार का एक कारण रहा है.

3. दतिया हार की सबसे बड़ी वजह नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटना माना जा रहा है. क्योंकि इसी के बाद से ही बीजेपी को बेतिया के साथ-साथ आसपास अंतर्कलह का सामना करना पड़ा. आलम यह रहा कि हर छोटी बड़ी जिम्मेदारी सीधे मंत्रियों को सौंपी गई.

4. दतिया में नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटने के बाद एक चर्चा थी कि बीजेपी अपने पुराने ब्राह्मण नेताओं को ठिकाने लगा रही है. इनमें पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव का उदाहरण पेश किया गया. दावा किया गया कि बीजेपी ने नरोत्तम को ठिकाने लगाने की तैयारी कर ली. यही वजह रही कि ब्राह्मण वोट बीजेपी से छिटक गया. जिसका नतीजा आपके सामने है. खामियाजा यह रहा कि आशुतोष नरोत्तम मिश्रा के बूथ से भी चुनाव हार गए.

5. दतिया में हार के कई और कारण हैं, जिन्होंने असर किया है. इनमें हाल ही में हुआ जेन जी प्रदर्शन भी है, ऐसा कहा जा रहा है कि बीजेपी लोग नाराज हैं. यही वजह है कि उन्‍होंने अपनी नाराजगी बीजेपी को हराकर निकाली है. इसके अलावा यह भी एक कारण है कि कई सीनियर नेता नाराज चल रहे थे. उन्होंने दतिया में काम नहीं किया.

कांग्रेस की जीत की वजह

1. कांग्रेस की जीत को लेकर सबसे बड़ा फैक्‍टर यही रहा है कि कांग्रेस ने बीजेपी का टिकट घोषित होने के बाद अपने प्रत्याशी के नाम का ऐलान किया था. बीजेपी से सबक लेते हुए कांग्रेस ने स्थानीय नेता को महत्व दिया.

2. कांग्रेस ने इस चुनाव में अपनी पूरी टीम मैदान में उतार दी थी. नेताओं का खास फोकस बूथ पर था. इसके लिए बड़े और सीन‍ियर नेताओं ने गांव-गांव जाकर छोटी-छोटी सभाएं की और घनश्‍याम सिंह के समर्थन में माहौल बनाया.

3. यह बात भी कही जा सकती है कि घनश्याम सिंह को जेनीजी आंदोलन का भी फायदा मिला है. युवा वर्ग बीजेपी से नाराज था, जिसके विकल्प में सबने कांग्रेस को वोट दिया.

4. कांग्रेस ने इस बार एकजुटता के साथ प्रचार प्रसार किया. चुनाव नतीजों के एक दिन पहले तक सब कुछ ठीक था. एक दिन पहले ही पूर्व विधायक राजेंद्र भारती को पार्टी विरोधी काम करने के आरोप में निष्कासित कर द‍िया गया. खुद कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी 291 में 251 बूथ पर पहुंचे और लोगों से बातचीत की.

कुल मिलाकर यह कहा जा रहा है कि बीजेपी को यह सीट दिल्‍ली में हुए जंतर मंतर के प्रदर्शन के कारण गंवानी पड़ी है. तो कई लोगों का मानना है कि नरोत्तम का टिकट काटना बीजेपी आलाकमान को भारी पड़ गया है. जिसका सीधा असर दतिया चुनाव नतीजों में देखने को मिला.

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