इनपुट- सचिन शर्मा
Bhind: कृषि उपज मंडी समिति आलमपुर के अंतर्गत आने वाली उपमंडी दबोह में पिछले कई वर्षों से बुनियादी ढांचे का भारी अभाव बना हुआ है. मंडी प्रशासन की उदासीनता के कारण आज तक न तो मंडी कार्यालय का अपना भवन बन सका है और न ही समिति के पास स्वयं का प्रांगण है. बरसों से उपमंडी का दफ्तर किराए के मकान में संचालित हो रहा है, वहीं मंडी प्रांगण भी निजी जमीन पर लगने को मजबूर है.
दलदल में तब्दील हुई मंडी
हाल ही में हुए जलभराव के चलते उपमंडी प्रांगण पूरी तरह दलदल में तब्दील हो चुका है. प्रांगण में भारी कीचड़ और पानी भरने से किसान अपनी फसलें बेचने के लिए नहीं पहुंच पा रहे हैं, जिससे व्यापारियों का कारोबार भी बुरी तरह ठप हो गया है. व्यापारियों का आरोप है कि वे हर महीने नियमित रूप से मंडी टैक्स का भुगतान करते हैं, लेकिन इसके बावजूद मंडी बोर्ड द्वारा उन्हें कोई सुविधा नहीं दी जा रही. जब भी इस समस्या को लेकर मंडी अधिकारियों से शिकायत की जाती है, तो वे जमीन को निजी बताकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेते हैं.
कैसे खत्म होगी जलभराव की समस्या?
हालांकि मध्य प्रदेश राज्य कृषि विपणन बोर्ड, भोपाल द्वारा 28 मार्च 2025 को विवादित जमीन की अदला-बदली से संबंधित पत्र भी जारी किया जा चुका है, फिर भी मंडी बोर्ड प्रशासन अब तक शासकीय जमीन और कार्यालय का निर्माण नहीं करा पाया है. स्थानीय किसानों और व्यापारियों ने शासन से मांग की है कि जमीन की अदला-बदली की प्रक्रिया को जल्द पूरा कर शासकीय प्रांगण और कार्यालय भवन का निर्माण कराया जाए, ताकि जलभराव की समस्या खत्म हो और व्यापार सुचारू रूप से चल सके.
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