इनपुट-सचिन शर्मा
Bhind: लहार सिविल अस्पताल से संवेदनहीनता का एक बड़ा मामला सामने आया है. महुआ मोड़ पर हुए सड़क हादसे में घायल युवक को एम्बुलेंस से अस्पताल लाया गया था, लेकिन स्वास्थ्यकर्मियों ने उसे इमरजेंसी वार्ड में ले जाने के बजाय पार्किंग में ही बारिश के बीच छोड़ दिया. करीब आधे घंटे तक मरीज खुले आसमान के नीचे दर्द से कराहता रहा. जब आसपास मौजूद लोगों ने इसका वीडियो बनाना शुरू किया और विरोध जताया, तब जाकर अस्पताल स्टाफ ने मरीज को अंदर पहुंचाया.
नाकामी छिपाने की कोशिश
मामला तूल पकड़ते ही अस्पताल प्रबंधन ने अपनी नाकामी छिपाने की कोशिश शुरू कर दी. बीएमओ ने सफाई देते हुए कहा कि एम्बुलेंस कर्मियों ने अंदर किसी को सूचना नहीं दी थी और जैसे ही जानकारी मिली, मरीज का इलाज शुरू कर दिया गया. हालांकि सामने आए आधिकारिक दस्तावेजों ने बीएमओ के इस दावे को झूठा साबित कर दिया है.
अस्पताल के रिकॉर्ड में क्या मिला
अस्पताल के रिकॉर्ड में मरीज को शाम 4:12 बजे भर्ती दिखाया गया है, जबकि शाम 4:35 बजे के वायरल वीडियो में मरीज अस्पताल परिसर के बाहर ही तड़पता हुआ नजर आ रहा है. कागजों में दर्ज इस फर्जी समय और अस्पताल प्रशासन की लीपापोती से स्थानीय लोगों में स्वास्थ्य विभाग के प्रति भारी आक्रोश है.
अस्पताल में डॉक्टरों की अनुपस्थिति और लापरवाही पर बीएमओ डॉ. विजय शर्मा ने कहा कि युवक शराब के नशे में धुत था. एंबुलेंस स्टाफ उसे बाहर छोड़कर गया, जो उनकी गलती है. बाद में अस्पताल स्टाफ ने मरीज को अंदर वार्ड में भर्ती कर उसका समुचित इलाज शुरू कर दिया था.
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