मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशा अनुसार मुरैना जिले की बंद पड़ी कैलारस शुगर मिल को फिर से चालू करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में 19 अगस्त 2025 को हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में लिए गए निर्णय के तहत कैलारस चीनी मिल की भूमि एमएसएमई विभाग को हस्तांतरित कर दी गई थी. मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव के निर्देशानुसार इस मिल का पुनरुद्धार कर क्षेत्र में रोजगार, औद्योगिक गतिविधि और स्थानीय आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए प्रक्रिया को प्रारंभ किया गया है.
इस संबंध में एमएसएमई विभाग ने रुचि की अभिव्यक्ति (EOI) आमंत्रित की है. मिल को प्रारंभ करने के लिए ऑन लाइन प्रस्ताव 15 सितम्बर तक आमंत्रित किए गए हैं और उन्हें अगले दिन 16 सितंबर को खोला जाएगा. सरकार “कैलारस शुगर मिल” को जैसी है, जहां है के आधार पर लीज पर देने जा रही है. इच्छुक प्रस्ताव दाता 31 अगस्त और 01 सितंबर 2026 को सुबह 11 बजे से मिल की साइट विजिट कर सकते है.
3 सितंबर को होगी प्रि -बिड मीटिंग
अभिव्यक्ति (EOI) की प्रि -बिड मीटिंग 3 सितंबर 2026 को दोपहर 3 बजे से विंध्याचल भवन भोपाल स्थित चौथी मंजिल मीटिंग हॉल में होगी. इच्छुक कंपनियां , संस्थाए इस संबंध में लिखित प्रश्न आदि 7 सितंबर 2026 शाम 5 बजे तक पूछ सकेंगे. मिल संचालन के लिए इच्छुक प्रस्तावकों के लिए रुचि की अभिव्यक्ति (EOI) जमा करने की अंतिम तिथि 15 सितम्बर शाम 5 बजे रखी गई है. प्राप्त प्रस्ताव अगले दिन 16 सितंबर को शाम 5 बजे खोले जाएंगे.
ऑनलाइन आवेदन
इच्छुक कंपनियां जो शुगर और संबंधित उप-उत्पादों के निर्माण में सक्षम हैं, वे MP Tenders पोर्टल www.mptenders.gov.in पर ऑनलाइन आवेदन कर सकती हैं. विस्तृत जानकारी mpmsme.gov.inपर उपलब्ध है. कैलारस शुगर मिल कैलारस, जिला मुरैना में NH-552 पर, कैलारस रेलवे स्टेशन से 3 किमी से कम दूरी पर स्थित है.
30 वर्ष होगी लीज अवधि
मिल की क्षमता1,250 प्रतिदिन गन्ना पेराई क्षमता है. मिल की संपत्तियां में फैक्ट्री बिल्डिंग, प्लांट-मशीनरी, गोदाम, वर्कशॉप और 12.86 हेक्टेयर भूमि है. लीज अवधि 30 वर्ष होगी और संतोषजनक कार्य के आधार पर यह अवधि बढ़ाई जा सकेगी. सरकार मिल को “जैसी है, जहां है” के आधार पर लीज पर देने जा रही है. इच्छुक प्रस्तावक 31 अगस्त और 1 सितंबर 2026 को सुबह 11 बजे से मिल की साइट विजिट कर सकते हैं.
बंद मिलों/फैक्ट्रियों के श्रमिकों के लिए सरकार के प्रमुख प्रयास
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश सरकार ने वर्षों से बंद पड़ी मिलों और औद्योगिक इकाइयों को पुनर्जीवित करने तथा श्रमिकों की लंबित देनदारियों के समाधान को प्राथमिकता दी है. इंदौर की हुकुमचंद मिल के लंबे समय से लंबित मामले का समाधान करते हुए करीब ₹224 करोड़ की राशि से लगभग 4,700 श्रमिक परिवारों को राहत दी गई.
देनदारियों का भी भुगतान कर श्रमिकों को राहत
उज्जैन की विनोद मिल के श्रमिकों की लंबित देनदारियों का भी भुगतान कर उन्हें राहत प्रदान की गई. ग्वालियर की जेसी मिल के करीब 8,000 श्रमिकों की लंबित देनदारियों के समाधान की प्रक्रिया को तेज करने के निर्देश दिए गए हैं. मिल की भूमि के बेहतर औद्योगिक उपयोग की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं. सज्जन मिल, रतलाम के मामले में भी सरकार द्वारा आवश्यक कार्रवाई और समाधान की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं.
समाधान की दिशा में भी सरकार की पहल
उज्जैन की बंद सोयाबीन फैक्ट्री के श्रमिकों की लंबित समस्याओं और भुगतान के समाधान की दिशा में भी सरकार ने पहल की है. सरकार का प्रयास है कि बंद औद्योगिक परिसंपत्तियों का बेहतर उपयोग कर नई औद्योगिक गतिविधियां शुरू हों और अधिक से अधिक रोजगार के अवसर पैदा हों. “वर्षों से लंबित मामलों को केवल फाइलों में रखने के बजाय उनके व्यावहारिक समाधान की दिशा में सरकार लगातार आगे बढ़ रही है.”
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